इंदौर में दूषित पानी का कहर: 25वीं मौत ने खोली प्रशासन की पोल, परिवार तबाह और शहर में दहशत

इंदौर दूषित पानी मौतें


इंदौर में दूषित पानी से बढ़ता संकट

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह विकास नहीं बल्कि दूषित पानी से हो रही मौतें हैं। भागीरथपुरा इलाके से सामने आई 25वीं मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता को भी उजागर करती है।


25वीं मौत: हेमंत गायकवाड़ की दर्दनाक कहानी

भागीरथपुरा निवासी हेमंत गायकवाड़ (51) पिछले कई दिनों से जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे।

  • 22 दिसंबर को दूषित पानी पीने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी
  • पहले परदेशीपुरा के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया
  • हालत गंभीर होने पर 7 जनवरी को अरविंदो अस्पताल रेफर किया गया
  • मंगलवार देर रात करीब 3 बजे इलाज के दौरान उनका निधन हो गया

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, हेमंत पहले से कुछ बीमारियों से ग्रसित थे, लेकिन उल्टी-दस्त और इंफेक्शन ने उनकी स्थिति को और खराब कर दिया।


परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हेमंत गायकवाड़ अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।

  • वह ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे
  • उनके पीछे चार बेटियां रह गई हैं:
    • रिया (21)
    • जिया (20)
    • खुशबू (16)
    • मनाली (12)

पिता की मौत के बाद परिवार गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट में फंस गया है। अब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल है—आगे जीवन कैसे चलेगा?


भागीरथपुरा में हालात बेहद गंभीर

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में लंबे समय से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतें की जा रही थीं।
लेकिन आरोप है कि:

  • नगर निगम ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया
  • पाइपलाइन और पानी की सप्लाई की जांच नहीं हुई
  • शिकायतों को नजरअंदाज किया गया

नतीजा यह हुआ कि आज हालात बेकाबू हो चुके हैं।


आंकड़े जो डराते हैं

अब तक की स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • 25 लोगों की मौत
  • 38 मरीज अस्पताल में भर्ती
  • 10 की हालत गंभीर
  • 3 मरीज वेंटिलेटर पर

इलाके में भय और गुस्से का माहौल है। लोग घरों में सप्लाई होने वाले पानी को लेकर डरे हुए हैं।


प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • क्या समय पर जांच होती तो मौतें रोकी जा सकती थीं?
  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • पीड़ित परिवारों को मुआवजा कब मिलेगा?

लोग अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

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