साइबर ठगी
रायपुर में एक बड़ी साइबर ठगी की घटना सामने आई है, जिसमें तीन फर्जी कॉल सेंटरों को ध्वस्त कर 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन कॉल सेंटरों द्वारा विदेशों में बैठे नागरिकों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही थी। इस अपराध में शामिल मुख्य आरोपी सुपरवाइज़र भी थे, जो विभिन्न राज्यों और देशों से इस नेटवर्क में जुड़े हुए थे।
कैसे काम करता था ये ठगी का नेटवर्क?
यह ठगी एक सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही थी, जो निम्नलिखित चरणों में बांटी जा सकती है:
- डेटा संग्रहण:
कॉल सेंटर कर्मचारी व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अमेरिका के बैंकों में लोन लेने वालों का डेटा इकट्ठा करते थे। - सिबील स्कोर सुधार का झूठा आश्वासन:
लोन लेने वाले व्यक्ति को सिबील स्कोर सुधारने का आश्वासन दिया जाता था। इसके बाद, बैंक से संबंधित जानकारी प्राप्त कर ली जाती थी। - फर्जी चेक तैयार करना:
उसके बाद, आरोपियों द्वारा फर्जी चेक तैयार कर के बैंक में जमा कर दिए जाते थे। छोटी रकम के कारण, बैंक जल्दी पैसे जमा कर देता था। - सिबील सुधार का दावा और गिफ्ट कार्ड की मांग:
ठग व्यक्ति से यह कहकर गिफ्ट कार्ड खरीदने की मांग करते थे कि उनके खाते में पैसे डाले गए हैं और सिबील सुधार दिया गया है। फिर गिफ्ट कार्ड के माध्यम से ठगी की रकम भारत में लाकर हवाला के जरिए मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचा दी जाती थी।
कैसे हुआ खुलासा?
साइबर अपराध और एंटी क्राइम यूनिट की संयुक्त टीम ने रायपुर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टॉवर में दबिश दी और वहां कई व्यक्तियों को अवैध कॉल सेंटर चलाते हुए पकड़ा। इन सेंटरों में काम करने वाले कर्मचारी कंप्यूटर और लैपटॉप के जरिए विदेशों में नागरिकों को ठग रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों से क्या मिला?
- 67 मोबाइल फोन
- 18 लैपटॉप
- 28 कंप्यूटर सेट
- अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
इन सभी उपकरणों से प्राप्त दस्तावेज, स्क्रिप्ट, और फर्जी अरेस्ट वारंट ने पुलिस की जांच को और अधिक आसान बना दिया।
पुलिस कार्रवाई और आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों में कई नामचीन लोग शामिल थे, जो अहमदाबाद, दिल्ली, गाजियाबाद, और विभिन्न अन्य जगहों से रायपुर आए थे। इन आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे इस अपराध में संलिप्त थे और ठगी की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानबूझकर काम कर रहे थे।
साइबर अपराध से बचाव के उपाय
- सजग रहें: किसी भी अनजान कॉल से बचें, विशेषकर जब वह बैंकिंग या लोन से संबंधित हो।
- गिफ्ट कार्ड की जानकारी साझा न करें: ठगों द्वारा गिफ्ट कार्ड का झांसा देकर पैसे की ठगी की जाती है।
- स्मार्टफोन और लैपटॉप का प्रयोग: अगर आपको लगता है कि आपके डिवाइस में कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही है, तो उसे तुरंत बंद कर दें और साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करें।