रहस्य बनी गृह मंत्रालय के कर्मचारी की मौत संवेदनहीन हुई गाज़ियाबाद पुलिस।

गाज़ियाबाद में गृह मंत्रालय में कार्यरत युवक प्रशांत की मौत का रहस्य लगातार गहराता जा रहा है, मृतक के परिवार का आरोप पुलिस ने दो दिन तक नहीं की एफआईआर दर्ज, जबकि मृतक के परिवार को इंसाफ दिलाने के बजाए गाज़ियाबाद पुलिस पहले तो सीमा विवाद में उलझी रही और फिर उसके बाद मामला दर्ज हुआ तो प्रशांत की मौत की वजह तलाशने में नाकाम रही।

प्रशांत की मौत के बाद परिजन विजय नगर थाने गए, जहां से उनको दो दिन चक्कर कटाए गए और फिर मामला दर्ज नहीं किया, जिसके बाद प्रशांत के परिजनों ने क्रासिंग रिपब्लिक थाने में मामले की शिकायत की।

गाज़ियाबाद का रहने वाला प्रशांत गृह मंत्रालय में कान्ट्रैक्ट बेस काम करता था और वो हमेशा की तरह की काम पर गया था और मां से कहा था कि वो थोड़ा देर से घर आएगा, लेकिन देर रात तक भी घर नहीं पहुंचा तो मां ने फोन किया तो जवाब मिला कि थोड़ी देर में घर आ रहा है और उसके बाद प्रशांत का मोबाइल फोन बंद हो गया, रात भर परिजन प्रशांत का इंतज़ार करते रहे लेकिन वो वापिस घर नहीं लौटा।

सुबह के वक्त प्रशांत के दो दोस्त घर पर आए और कहा कि प्रशांत का एक्सीडेंट हो गया और वो हमें नहीं मिल रहा है, प्रशांत के दोस्तों ने उसका मोबाइल और पर्स भी परिजनों को दिया। काफी तलाश के बाद पता चला कि पुलिस ने एक घायल युवक को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया है, परिजन वहां पहुंचे लेकिन तब तक प्रशांत की मौत हो चुकी थी।

प्रशांत की मौत के बाद से ही लगातार गाजियाबाद पुलिस के उपर सवाल खड़े हो रहे है, क्योंकि पुलिस इसको एक सडक हादसा मानकर चल रही है, जबकि मृतक की मां पुलिस से सवाल कर रही है और पुलिस मौन धारण किए हुए है। इस मामलें में पुलिस अधिकारी भी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है, सबसे बड़ा सवाल अगर प्रशांत की मौत सड़क हादसा है तो फिर उसके सिर्फ सिर पर चोट क्यों लगी, चेहरा इतना कुचला हुआ कि जल्दी से शिनाख्त ना हो सके,

जबकि शरीर के बाकी किसी भी हिस्से पर कोई भी चोट के निशान नहीं है। क्योंकि प्रशांत का शव जिस हालत में मिला है, उससे तो यही लगता है कि अगर एक्सीडेंट है तो फिर बड़ा भयंकर है, लेकिन इसके साथ ही ये सवाल भी जुड़ा है कि वाहन क्षतिग्रस्त नहीं है, उसके दूसरें दोस्तों को खरोंच तक नहीं आई, घटनास्थल नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट की सीसीटीवी फुटेज कहां है, ये वो तमाम सवाल है जिनका जवाब देने के बजाए गाजियाबाद पुलिस अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है।

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