उमरकोट आशाकर्मी की मौत, न्याय की माँग को लेकर उग्र आंदोलन, डॉक्टर की गिरफ्तारी की माँग

उमरकोट/नवरंगपुर : नवरंगपुर ज़िले के उमरकोट ब्लॉक अंतर्गत चिकल्पदर सेक्टर के बड़ा बासिनी गाँव की आशाकर्मी श्रीमती दईमती भतरा की दर्दनाक मौत को लेकर कल नवरंगपुर में तीव्र विरोध-प्रदर्शन हुआ।

जानकारी के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने पर दईमती को उमरकोट स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉ. सागरिका स्वाईं की लापरवाही से ऑपरेशन के दौरान बच्चा बाहर नहीं निकाला जा सका। आरोप है कि डॉक्टर ने भ्रूण को भीतर ही धकेलकर टांका लगा दिया। इसके बाद उन्हें नवरंगपुर जिला मुख्य अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में डाबुगाँव के पास एम्बुलेंस में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना में माँ और नवजात दोनों की मौत हो जाने से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया।

घटना के बाद लगभग दो सौ ग्रामीण पुरुष-महिला तथा सैकड़ों आशाकर्मी मिलकर दईमती का शव उमरकोट जोनल अस्पताल चौराहे पर रखकर सड़क जाम आंदोलन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टर सागरिका स्वाईं की तत्काल गिरफ्तारी तथा परिजन को राज्य सरकार से 10 लाख और केंद्र सरकार से 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने की माँग की।

इस आंदोलन का नेतृत्व भारतीय मज़दूर संघ से संबद्ध ओडिशा राज्य आशाकर्मी संघ के जिला अध्यक्ष बाँक बिहारी विषोई, सलाहकार परमेश्वर विषोई, सचिव विष्णु प्रसाद विषोई, जिला सभानेत्री कविता स्वाईं और संपादिका गीतांजलि हरिजन समेत अन्य पदाधिकारियों ने किया। बाद में उमरकोट नगरपालिका अधिकारी और अतिरिक्त तहसीलदार मौके पर पहुँचे तथा पाँच दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई का लिखित आश्वासन देने पर आंदोलन समाप्त किया गया।

गौरतलब है कि इस प्रकरण को लेकर 4 सितंबर को ही जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर 11 सितंबर को नवरंगपुर जिला स्वास्थ्य कार्यालय का घेराव भी किया गया था। उस समय उपजिलाधिकारी ने संघ नेताओं से वार्ता कर कुछ समय माँगा था।

जिला मज़दूर संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि 4 अक्टूबर 2025 तक दोषी डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।

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