रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि शांति बनाए रखने के वास्ते सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए तैयार रहने की जरूरत है

राजनाथ सिंह ने आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के शीर्ष कमांडरों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है और शांति बनाए रखने के वास्ते आर्म्‍ड फोर्सेज को युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए. रक्षा मंत्री ने यहां पहले संयुक्त कमांडर सम्मेलन में यूक्रेन और गाजा में जारी संघर्षों के साथ-साथ बांग्लादेश की स्थिति पर बात की और सेना से इन घटनाक्रम का विश्लेषण करने और इस अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया.

डिफेंस मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त सैन्य दृष्टिकोण विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया. राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ 4 साल से अधिक समय से जारी सीमा विवाद का भी जिक्र किया और स्थिति का गहन विश्लेषण करने पर बल दिया. राजनाथ सिंह ने कहा, ‘वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत को शांति का फायदा मिल रहा है और वह शांतिपूर्ण तरीके से विकास कर रहा है. हालांकि, बढ़ती चुनौतियों के कारण हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है.’

राजनाथ सिंह ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है कि हम अमृतकाल के दौरान शांति का माहौल बरकरार रखें. हमें अपने वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने वर्तमान में हमारे आसपास हो रही गतिविधियों पर नजर रखने और फ्यूचर प्‍लानिंग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है.’ उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए हमारे पास एक मजबूत और सुदृढ़ राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा होना चाहिए. उन्होंने कमांडरों से सशस्त्र बलों के शस्त्रागार में पारंपरिक और आधुनिक युद्ध उपकरणों के सही मिश्रण की पहचान करने और उसे शामिल करने का भी आह्वान किया.

राजनाथ सिंह ने स्‍पेस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में क्षमता विकास पर जोर दिया और इन्हें आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए अभिन्न अंग बताया. राजनाथ सिंह ने सैन्य नेतृत्व से डाटा और AI के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी प्रगति के उपयोग को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का भी आग्रह किया. दो दिवसीय सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ था. सम्मेलन में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने भी शामिल हुए.

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