Income Tax Refund Interest: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद हर टैक्सपेयर को अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार रहता है। साल 2025-26 के लिए टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी नियम जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
अगर सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) एक निश्चित समय सीमा के भीतर आपके रिटर्न को प्रोसेस करने में विफल रहता है, तो विभाग अपना वैधानिक अधिकार खो देता है। ऐसी स्थिति में न केवल आपको अपना रिफंड मिलता है, बल्कि विभाग को उस पर अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ता है।
रिटर्न प्रोसेसिंग के लिए क्या है विभाग की डेडलाइन?
इनकम टैक्स कानून के अनुसार, विभाग के पास आपके रिटर्न को प्रोसेस करने के लिए सीमित समय होता है। तकनीकी रूप से, जिस वित्तीय वर्ष (Financial Year) में रिटर्न दाखिल किया गया है, उसके समाप्त होने के 9 महीने के भीतर विभाग को कार्यवाही पूरी करनी होती है।
उदाहरण के लिए: अगर आपने अपना रिटर्न 16 सितंबर 2025 को दाखिल किया है, तो वित्त वर्ष 2025-26 के अंत (31 मार्च 2026) से अगले 9 महीने गिनने पर 31 दिसंबर 2026 की आखिरी तारीख निकलकर आती है। इसके बाद विभाग उस रिटर्न पर कोई आपत्ति नहीं जता सकता।
सेक्शन 143(1) और ‘इन्टीमेशन’ का महत्व
रिटर्न दाखिल करना प्रक्रिया का केवल आधा हिस्सा है। इसके बाद विभाग सेक्शन 143(1) के तहत रिटर्न की बारीकी से जांच करता है। इसमें टैक्सपेयर द्वारा किए गए दावों (Claims) और निवेशों का सत्यापन किया जाता है।
जांच पूरी होने पर विभाग एक ‘इन्टीमेशन’ (Intimation) नोटिस जारी करता है। अगर CPC तय समय सीमा के भीतर यह सूचना जारी नहीं करता है, तो यह माना जाता है कि विभाग ने उस वित्त वर्ष के लिए अपना अधिकार खो दिया है और आपका दाखिल किया गया रिटर्न अंतिम माना जाएगा।
रिफंड में देरी पर मिलता है 0.5% प्रतिमाह ब्याज
अगर विभाग की गलती या देरी के कारण रिफंड मिलने में समय लगता है, तो आप ब्याज के हकदार होते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 244A के तहत, रिफंड राशि पर 0.5% प्रति माह (6% सालाना) की दर से साधारण ब्याज दिया जाता है। यह ब्याज उस तारीख से गिना जाता है जब आपने रिटर्न फाइल किया था या जब टैक्स का भुगतान किया गया था।
टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?
- स्टेटस चेक करें: समय-समय पर आयकर पोर्टल पर जाकर ‘ITR Status‘ चेक करते रहें।
- ई-वेरिफिकेशन: सुनिश्चित करें कि आपने अपना रिटर्न फाइल करने के बाद उसे 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफाई जरूर कर दिया हो।
- शिकायत दर्ज करें: अगर डेडलाइन बीतने के बाद भी रिफंड नहीं आता है, तो आप पोर्टल पर ‘Grievance’ टैब में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।