दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अंकुश जैन और वैभव जैन को 2017 के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी। इस मामले में दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन भी शामिल हैं। जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों मामलों में जमानत मंजूर की गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मई 2022 में सत्येंद्र जैन को फरवरी 2015 से मई 2017 तक मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करके 1.47 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वहीं, जून 2022 में अंकुश जैन और वैभव जैन को कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों को उनकी चल संपत्ति को अपनी संपत्ति के रूप में पेश करने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
ईडी ने कहा था कि दोनों आरोपियों ने इनकम टैक्स डिस्क्लोजर स्कीम के तहत कथित तौर पर पूर्व मंत्री को बचाने के लिए 8.6 करोड़ रुपये की अघोषित आय की घोषणा की थी। बैक डेट के डॉक्यूमेंट्स तैयार किए थे और पूर्व मंत्री से संबंधित 5 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग अपराध में शामिल थे।
दिल्ली की अदालत द्वारा पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की रिहाई के आदेश के दो दिन बाद अदालत ने उन्हें भी जमानत दे दी।
18 अक्टूबर को दिल्ली की अदालत ने सत्येंद्र जैन को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि इस मामले में मुकदमा शुरू होने की “कोई संभावना नहीं है”, “पूरा होना तो दूर की बात है”।
स्पेशल जज विशाल गोगने की अदालत ने सत्येंद्र जैन को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश देते हुए इस तथ्य को ध्यान में रखा कि आम आदमी पार्टी (आप) के नेता लंबे समय से जेल में बंद हैं।