दिल्लीवालों सावधान! प्रदूषण में अब यह नई बीमारी बढ़ा रही टेंशन, जानिए इसके बारे में सबकुछ

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लगातार पिछले कुछ दिनों से एयर क्वालिटी बेहद गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। लोगों को सांस लेने में भी काफी परेशानी हो रही है।इस बीच अब वॉकिंग निमोनिया से जुड़े मामले भी बढ़ रहे हैं। वॉकिंग निमोनिया आम तौर पर निमोनिया से कम गंभीर मानी जाता है। इसमें ना बेड रेस्ट की जरूरत होती है और ना ही अस्पताल में भर्ती होने की। इसलिए इसे वॉकिंग निमोनिया कहते हैं।

कैसे होता है वॉकिंग निमोनिया?

वॉकिंग निमोनिया आमतौर पर माइकोप्लाज्मा निमोनिया नाम के एक बैक्टेरिया से होता है। इस बैक्टीरिया से होने वाला इंफेक्टशन हल्का होता है लेकिन कुछ मामलों में गंभीर भी हो सकता है। शरीर का नॉर्मल चेकअप या एक्सरे से इसका पता लगाया जा सकता है।

क्या है लक्षण?

जिन लोगों को वॉकिंग निमोनिया होता है उन्हें बुखार, गले में खराश और खांसी की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा सांस लेने में भी थोड़ी परेशानी हो सकती है। यह बीमारी छींकने या खांसने से फैल सकता है। अगर वॉकिंग निमोनिया से ग्रसित शख्स किसी अन्य के सामने खांसता या छींकता है तो दूसरे व्यक्ति में भी वही बैक्टेरिया ट्रांसफर हो सकते हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह बीमारी ज्यादा फैलती है। ऐसे में बाजारों के साथ-साथ स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों को भी इससे बचने की जरूरत है। इससे बचने के लिए आप घरों से बाहर निकलने से पहले मास्क का इस्तमाल कर सकते हैं।

बता दें, दिल्ली में शुक्रवार सुबह धुंध छाई रही और न्यूनतम तापमान 11.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, वायु गुणवत्ता ‘‘बेहद खराब’’ श्रेणी में बनी रही और एक्यूआई 373 दर्ज किया गया। दिल्ली के 38 निगरानी केंद्रों में से नौ में एक्यूआई गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, ये केंद्र आनंद विहार, बवाना, जहांगीरपुरी, मुंडका, नेहरू नगर, शादीपुर, सोनिया विहार, विवेक विहार और वजीरपुर हैं। चार सौ या इससे अधिक एक्यूआई को गंभीर श्रेणी में माना जाता है और इससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता रविवार को पहली बार बेहद गंभीर श्रेणी को पार कर गई, जिसके बाद सोमवार सुबह ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत चरण चार के प्रतिबंध लागू किए गए। इन उपायों में निर्माण और तोड़ फोड़ की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध, स्कूल बंद करना तथा वाहनों पर सख्त प्रतिबंध शामिल हैं।

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