दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली की पहली ट्रांसजेंडर निगम पार्षद बॉबी को अग्रिम जमानत दे दी है। बॉबी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र हासिल करने के मामले में आरोपी हैं। निगम पार्षद बॉबी की अग्रिम जमानत निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने उनके और दिल्ली पुलिस के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद बॉबी को अग्रिम जमानत दे दी। बॉबी के वकील प्रवीण कुमार दुहान की ने अपनी दलीलों में कहा कि आरोपी पार्षद तीन बार जांच में शामिल हो चुकी हैं।
पीठ ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाए। एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिका पर फरवरी 2025 में सुनवाई होगी। दिल्ली पुलिस ने उन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र हासिल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले उन्होंने सुल्तानपुरी वार्ड से अनुसूचित जाति उम्मीदवार के तौर पर एमसीडी चुनाव लड़ा था।
चुनाव में हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी की शिकायत पर रोहिणी कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। रोहिणी कोर्ट ने 4 अक्टूबर को ट्रांसजेंडर एमसीडी पार्षद बॉबी किन्नर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि इस मामले में बॉबी से हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत है।
अदालत ने यह भी कहा था कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने में कोई सांठगांठ भी हो सकती है।कोर्ट ने कहा था कि जिस तरह से आवेदन पत्र जमा करते समय धुंधले और अस्पष्ट दस्तावेज अपलोड किए गए और प्रमाण पत्र जारी करने में गौतमबुद्ध नगर में संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया उससे पता चलता है कि यह एक बड़ी सांठगांठ हो सकती है जिसमें कई लोग शामिल हैं। आरोप है कि सुल्तानपुरी वार्ड की आरक्षित एससी महिला सीट पर 2022 के एमसीडी चुनाव लड़ने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था।