मलुहा के किसानों की मांग: 24 साल से मुआवजे का इंतजार, अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा

बिलाईगढ़। ग्राम मलुहा के किसान पिछले 24 वर्षों से मुआवज़े की प्रतीक्षा में हैं। उनकी ज़मीन अपर सोनिया जलाशय भंडोरा परियोजना में डूब गई थी, लेकिन अब तक उन्हें उचित मुआवज़ा नहीं मिला। इस अन्याय के खिलाफ भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ ने 6 अगस्त से बिलाईगढ़ में अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की है।

सोमवार को बिलाईगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के प्रदेश सचिव मनीष चेलक ने बताया कि किसानों ने बार-बार एसडीएम, कलेक्टर और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, भूख हड़ताल और प्रदर्शन भी किए, लेकिन हर बार सिर्फ़ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं हुई।

एक किसान को छोड़ सभी उपेक्षित
दो माह पूर्व प्रशासन ने एक अनुसूचित जनजाति के किसान को छोड़कर 6 अन्य प्रभावित किसानों के लिए आदेश जारी किए, लेकिन आज तक न मुआवज़ा मिला और न प्रक्रिया आगे बढ़ी। चेलक ने आरोप लगाया कि यह प्रशासन की टालमटोल और भेदभावपूर्ण नीति का हिस्सा है।

धरने की अनुमति न मिलने पर रोष
मनीष चेलक ने बताया कि 30 जुलाई को उन्होंने एसडीएम बिलाईगढ़ को धरने की अनुमति हेतु आवेदन दिया, लेकिन न तो पावती दी गई, न कोई उत्तर मिला। अंततः उन्हें डाक से आवेदन भेजना पड़ा।

6 अगस्त से शांतिपूर्ण आंदोलन
चेलक ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण और कानूनी होगा, लेकिन अनिश्चितकालीन रहेगा जब तक न्याय नहीं मिलता। उन्होंने प्रशासन से तीन मांगें रखीं:
    प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवज़ा दिया जाए।
    धरना-प्रदर्शन की अनुमति दी जाए और आवेदन की पावती सौंपी जाए।
    यदि प्रस्तावित स्थल अस्वीकार्य है तो वैकल्पिक स्थान की सूचना तत्काल दी जाए।

मलुहा के किसानों की यह लड़ाई सिर्फ मुआवज़े की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की है। अब देखना यह है कि प्रशासन 6 अगस्त से शुरू हो रहे इस आंदोलन पर कैसा रुख अपनाता है।

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