वाराणसी में डेंगू ने अब रफ्तार पकड़ ली है। यहां डेंगू के अब तक 95 मरीज मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा लंका, सामने घाट, सीर गोवर्धन इलाकों में डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। डेंगू के लिए लोग खुद भी जिम्मेदार हैं। उनके घरों में ही डेंगू के मच्छर का लार्वा पनप रहे हैं लेकिन उन्हे पता नहीं है। मलेरिया विभाग को हर 56वें घर में लार्वा मिल रहा है। सबसे ज्यादा कूलर और फ्रिज में यह पनप रहा है।
जिले में इस समय वायरल बुखार के मरीज भी बढ़ गए हैं। इन मरीजों की डेंगू और मलेरिया की जांच अनिवार्य रूप से हो रही है। प्रतिदिन दो से तीन मरीजों में डेंगू पाया जा रहा है। डेंगू के मरीज मिलने के बाद मलेरिया विभाग की टीम घरों में लार्वा सर्चिंग अभियान चला रही है। अब 48692 घरों में सर्चिंग अभियान चलाया।
इस दौरान 867 घरों में डेंगू का लार्वा मिला। घरों में कूलर, फ्रिज के अलावा गमलों में भी लार्वा मिला है। स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि अपने घर में एक सप्ताह से अधिक पानी इकट्ठा न रखें। इस पानी में डेंगू के ममच्छर का लार्वा पनपने लगता है। नोडल अधिकारी डॉ. एसएस कनौजिया ने कहा कि पिछले साल से डेंगू के मरीज अभी कम हैं। फिर भी लोगों को सजग रहने की जरूरत है।
वायरल बुखार ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को मंडलीय अस्पताल के मेडिसिन विभाग में 453 और जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में 433 मरीज परामर्श के लिए पहुंचे थे। दोनों अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की कतार लग रही है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पीके सिंह ने कहा कि वायरल बुखार के रोगी बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि तीन दिन से अधिक बुखार है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
मंडलीय अस्पताल के फिजिशयन डॉ. एसबी उपाध्याय ने कहा कि डेंगू में 104 फारेनहाइट डिग्री का बुखार होता है। सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, आंखों के पीछे दर्द, ग्रंथियों में सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते होना इसके लक्षण हैं। अगर ऐसा होता है तो डॉक्टर से संपर्क करें।