1995 में बंगाल में हथियारों का लगाया था जखीरा, सरगना को डेनमार्क ने भारत को सौंपने से किया इनकार

डेनमार्क ने 1990 के दशक में पश्चिम बंगाल में हथियारों की तस्करी के मामले में मास्टरमाइंड आरोपी को भारत को प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया है। डेनमार्क की एक कोर्ट ने गुरुवार को इस पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के जोखिम का हवाला देते हुए 1995 के हथियार तस्करी मामले में वांटेड डेनिश नागरिक के प्रत्यर्पण के भारत के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। भारत पिछले कई सालों से नील्स होल्क को पश्चिम बंगाल के विद्रोही समूह को करीब चार टन हथियार सप्लाई करने के मामले में प्रत्यर्पित करने की मांग कर रहा है।

अदालत ने फैसला सुनाया कि होल्क को भारत भेजना डेनमार्क के प्रत्यर्पण कानूनों का उल्लंघन होगा। सरकारी वकील ने रॉयटर्स को बताया है कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी या नहीं। वहीं आरोपी के वकील जोनास क्रिस्टोफ़रसेन ने बताया, “भारत ने वैध गारंटी नहीं दी है। “सरकारी वकील और भारत के बीच शर्तों पर बातचीत करते हुए छह साल हो गए हैं। अब कोर्ट कहती है कि उसकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।”

गौरतलब है कि होल्क ने पहले डेनमार्क की एक अदालत में स्वीकार किया था कि वह दिसंबर 1995 में छह अन्य लोगों के साथ एक रूसी कार्गो विमान के जरिए पश्चिम बंगाल में हथियारों की तस्करी कर रहा था। उस समय उसे किम डेवी के नाम से जाना जाता था। क्रिस्टोफ़रसेन ने कहा कि हथियार ‘आनंद मार्ग’ से जुड़े लोगों के लिए थे। आनंद मार्ग एक विद्रोही आंदोलन था जिसे होल्क के मुताबिक उस समय पश्चिम बंगाल में सत्ता में मौजूद कम्युनिस्ट पार्टी से बचाव के लिए हथियारों की ज़रूरत थी। हालांकि हथियार योजना के मुताबिक कहीं और गिरे और भारतीय अधिकारियों ने उन्हें खोज निकाला।

इस घटना के बाद पूरे दल पर मुकदमा चलाया गया और उसे भारत में ही कैद कर लिया गया था। इस दौरान होल्क बच निकला और नेपाल भाग गया।1996 में वह डेनमार्क वापस आ गया। डेनमार्क के सरकारी वकील के मुताबिक डेनमार्क में हुए मुकदमे में यह तय नहीं हुआ कि होल्क निर्दोष है या नहीं बल्कि सिर्फ यह तय हुआ है कि उन्हें प्रत्यापित किया जायेगा या नहीं।

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