पलवल पानी संकट
हरियाणा के पलवल जिले के छयांसा गांव में पिछले 15 दिनों में पीने के पानी के कारण कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, इनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं। मरने वालों में चार मामले हेपेटाइटिस-बी से जुड़े बताए जा रहे हैं।
इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों के बाद पलवल की घटना ने पूरे देश में पानी की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।
घटनाक्रम
- छयांसा गांव की कुल आबादी लगभग 5700 है।
- 27 जनवरी से 11 फरवरी के बीच कम से कम 7 मौतें हुईं, जिनमें चार की मौत लिवर फेल होने से हुई।
- प्रभावित लोगों में 9 साल से 65 साल तक की उम्र के लोग शामिल हैं।
- मरीजों ने बुखार, पेट में दर्द, दस्त और सिरदर्द की शिकायतें दर्ज कराई।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
- 400 से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है।
- जांच के लिए रक्त और अन्य नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं।
- गंभीर मामलों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- डोर-टु-डोर स्क्रीनिंग के लिए मेडिकल टीम तैनात।
- अब तक 210 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं:
- 2 लोग हेपेटाइटिस-बी
- 9 लोग हेपेटाइटिस-सी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी Satinder Vashisht ने कहा कि लगभग 1500 लोगों की गहन जांच की जा रही है और संबंधित परिवारों को भी स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जाएगा।
हेपेटाइटिस-बी और पीने के पानी का खतरा
हेपेटाइटिस-बी यकृत का गंभीर संक्रमण है, जो वायरस (HBV) के कारण होता है। संक्रमित पानी और खराब स्वच्छता इसे फैलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
छयांसा गांव में पानी की गुणवत्ता पर संदेह जताया जा रहा है और संभावित खाद्य विषाक्तता और दूषित पेयजल की वजह से मौतों की भी जांच चल रही है।
इंदौर से तुलना
मध्य प्रदेश के Indore में जहरीले पानी के कारण 16 लोगों की मौत हो चुकी है। पलवल की घटना ने पानी की सुरक्षा और निगरानी की जरूरत को और बढ़ा दिया है।
स्थिति का हाल
- लगभग 800 लोगों को ओपीडी में देखा गया।
- अब तक गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार चल रहा है।
- स्वास्थ्य विभाग लगातार गांव में रहने वाले लोगों की निगरानी कर रहा है।