सीता की अग्निपरीक्षा बार-बार मत लो… योगी आदित्‍यनाथ क्‍या अपनी बात से हिंदुओं को एकजुट कर पाएंगे?

हिंदू एकता के लिए योगी आदित्‍यनाथ अनूठा अभियान चलाए हुए हैं. जहां एक तरफ वे ‘बटेंगे तो कटेंगे’ स्‍लोगन देते हैं, तो वहीं अयोध्‍यावासियों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि ‘हमने मंदिर निर्माण का वादा 2017 में किया था, वो पूरा किया. अब सीता की अग्निपरीक्षा बार-बार नहीं होनी चाहिए.’ योगी यह बातें अयोध्या में बुधवार को दीपोत्सव के अवसर अयोध्यावासियों को संबोधित करते हुए बोल रहे थे. भाषण का सीधा संदेश समझने वाले समझ रहे थे. योगी का यह आग्रह अयोध्यावासियों के लिए तो था ही पर इसके राजनीतिक मायने सिर्फ अयोध्‍या तक ही सीमित नहीं हैं. उत्तर प्रदेश में 9 सीटों के लिए विधानसभा उपचुनाव हो रहे हैं. इसके साथ ही महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. जाहिर है कि योगी के इस शब्दभेदी बाण की गूंज बहुत दूर तक सुनाई दे रही होगी.

जैसे ही राम मंदिर के प्रतिष्ठान के बाद दीपोत्सव के आठवें संस्करण में बुधवार को अयोध्या में उत्सव की धूम मची, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर नगरी के लोगों से कहा कि अब उनकी बारी है अपने आपको साबित करने की. योगी ने कहा, आपसे कहने आया हूं. आपने 2017 के बाद जो भी कहा वो अयोध्या में होकर रहा है. आपने 2017 में कहा था, योगी जी एक काम करो, मंदिर का निर्माण करो. मंदिर का तो निर्माण हो गया है, राम लला विराजमान हो गए हैं. इसलिए एहसास कराने आया हूं… डबल इंजन की सरकार ने जो कहा था, वो करके दिखा दिया. अब अयोध्या की बारी है. अयोध्या को फिर से अपने आपको साबित करने की बारी है. मां सीता की अग्नि परीक्षा बार-बार नहीं होनी चाहिए.

जाहिर है कि सीता मैय्या के अग्नि परीक्षा वाली बात अचानक उनके मुंह से नहीं निकली है. यह लोकसभा चुनावों में अयोध्या में मिली हार की टीस है. इस हार की पीड़ा सबसे अधिक किसे होगी? जाहिर है उस शख्स को होगी जो जिसने राम मंदिर निर्माण के दौरान राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए अयोध्या को अपना दूसरा घर बना लिया था. करीब हर हफ्ते सीएम की विजिट अयोध्या की होती रही. सीएम योगी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझकर पूरी करते रहे. अयोध्या में राम मंदिर ही नही पूरा का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर ही बदलकर रख दिया गया.

अयोध्या में जो हुआ इतना आसान काम नहीं था. जब कोई बड़ा बदलाव होता है तो बहुत सी समस्याएं आती हैं. उन सभी समस्याओं का सुलझाना आसान नहीं होता है. उसके लिए दिन रात मेहनत करनी होती है. योगी आदित्यनाथ दिन रात इस काम के लिए लगे रहे. पर जनता ने जैसा ठंडा रिस्पांस दिया उसकी टीस तो होगी ही. फ़ैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र जहां अयोध्या स्थित है की हार की पीड़ा उन्हें हर दिन सालती होगी. भाजपा ने राम मंदिर के उद्घाटन को लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाया था . वैसे तो पूरे यूपी में ही बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था पर अयोध्या की हार का दर्द असहनीय था.अयोध्या में मिल्कीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव होने वाला है. यह सीट सपा नेता अवधेश प्रसाद द्वारा छोड़ी गई थी, जिन्हें फैजाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुना गया था.

आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या का परिवर्तन डबल इंजन सरकार के वादे को पूरा करने का प्रमाण है. योगी ने कहा 2047 तक, जब भारत स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, काशी और मथुरा में भी ऐसा ही परिवर्तन होना चाहिए. उन्होंने विपक्ष पर सरकार की विकास योजनाओं में बाधा बनने का आरोप लगाते हुए कहा, जैसे माफिया डॉन खत्म होते हैं, वैसे ही ये बाधाएं भी समाप्त होंगी.

आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या का परिवर्तन सिर्फ शुरुआत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सनातन धर्म की धरोहर के विकास और इसे वैश्विक स्तर पर ले जाने की दृष्टि का हिस्सा है. उन्होंने कहा, दीपोत्सव न केवल रोशनी के माध्यम से सामाजिक और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है. जाहिर है ये राष्ट्रीय एकता का प्रतीक, काशी-मथुरा का जिक्र आदि यूपी के लिए नहीं हो रहा था.ये महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों के लिए अयोध्या से दिया गया संदेश था.

योगी आदित्यनाथ समझते हैं कि पार्टी में भी अपनी स्थिति को मजबूत रखना है तो ऐसे मुद्दे से जुड़ा रहना है जिसका लिए हिंदू समाज के बीच में उन्हें जाना जाता है. एक तरफ पार्टी को सत्ता में बनाए रखना है तो अपने कोर वोटर्स को खुश रखना पड़ेगा,दूसरी तरफ खुद की पोजिशन को भी न केवल बनाए रखना है बल्कि उसके आगे की ओर भी देखना है. इसके लिए जरूरी है कि हिंदू हृदय सम्राट की पोजिशन बरकरार रखा जाए. योगी जब हिंदू हितों की बात करते हैं तो उसका प्रभाव कुछ अलग ही होता है. जैसे बटेंगे तो कटेंगे वाला ही बयान है. यह बात किसी और नेता ने कही होती तो इतना प्रभावी नहीं हुआ होता. बांग्लादेश के संबंध में बोलते हुए योगी ने यह बात आगरा में कही थी . आज ऐसा लगता है कि बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनावों में ही नहीं 2029 के लोकसभा चुनावों तक इसे सबसे बड़ा मुद्दा बना चुकी होगी. ये मुद्दा पार्टी जितना अपनाती जाएगी, योगी आदित्यनाथ उतने ही मजबूत होते जाएंगे.

दीपोत्सव समारोह में, आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए अयोध्या में राम भक्तों का खून बहाने का आरोप लगाया.जिन्हें राम जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास पता है उन्हें यह भी पता होगा कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को कुचलने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किस तरह कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थी. पूरे प्रदेश से रामभक्तों की धरपकड़ हुई थी. गांव-कस्बों और शहरों से रातों-रात हजारों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था. सरकारी बसों का परिचालन बंद कर उन्हें रामभक्तों को जेल पहुंचाने के लिए किया जा रहा था.हजारों लोग भूमिगत भी हो गए थे.इतिहास में किसी भी आंदोलन को दबाने के लिए इस तरह का बल प्रयोग स्वतंत्र भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ था.

योगी के इस दावे से कोई इनकार नहीं कर सकता कि अयोध्या में अब वह आधारभूत संरचना है जो उसे स्वतंत्रता के बाद से कभी नहीं मिला था. योगी ने कहा कि जिन्होंने अयोध्या को बिजली से वंचित किया, जिन्होंने आपको राम की पैड़ी पर सड़े पानी में स्नान करने पर मजबूर किया, वही लोग आज भगवान राम के नाम पर बोल रहे हैं. अयोध्या को देश का पहला सोलर सिटी बना दिया गया है. जिस शहर में भगवान राम के पुष्पक विमान के उतरने के बाद हवाई जहाज नहीं उतरे, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी मिल गया है.

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