बंगाल के डॉक्टरों ने की मेडिकल काउंसिल भंग करने की मांग, स्वास्थ्य विभाग को लिखी चिट्ठी

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला रेजिडेंट डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले में शुरू हुए डॉक्टरों के प्रदर्शन के बाद बंगाल सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब बंगाल के डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग को एकचिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल को तत्काल भंग करने की मांग की है. पत्र में उन्होंने कहा है कि कथित भ्रष्टाचार और कानूनी अनियमितताओं के कारण पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल को तत्काल भंग किया जाये.

पत्र में लिखा गया है कि पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल (डब्ल्यूबीएमसी) के अस्तित्व को लेकर गंभीर चिंता है. डॉक्टरों ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि मानस चक्रवर्ती बिना किसी वैध सरकारी आदेश के पश्चिम बंगाल मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार बने हुए हैं. यह बात चक्रवर्ती की तरफ से ही सामने आई है. यह न केवल अनियमितता है, बल्कि खतरनाक भी है. क्योंकि इससे राज्य में चिकित्सा पेशे पर गंभीर कानूनी प्रभाव पड़ सकता है.

पत्र में कहा गया है कि कुछ पॉइंट हैं, जिन्हें देखते हुए इस मामले में तत्काल एक्शन जरूरी है.

1. रजिस्ट्रार के पद पर अवैध कब्जा: मानस चक्रवर्ती अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी रजिस्ट्रार के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें केवल 6 महीने का एक विस्तार दिया गया, जो बिना किसी औपचारिक सरकारी नियुक्ति के बहुत पहले ही खत्म हो चुका है. कानूनी प्राधिकरण के बिना इस अहम पद पर उनके निरंतर कब्जे के गंभीर कानूनी निहितार्थ हैं. एक अनधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षरित हजारों पंजीकरण प्रमाणपत्रों की वैधता अब गंभीर सवालों के घेरे में है.

2. जनता के विश्वास और कानूनी स्थिति से समझौता: रजिस्ट्रार की अनियमित नियुक्ति और कार्य परिषद की कानूनी स्थिति और एक वैध नियामक निकाय के रूप में कार्य करने की इसकी क्षमता को कमजोर करते हैं. यह बेहद चिंताजनक है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने इस तरह के महत्वपूर्ण पद पर कब्जा करने की अनुमति दी है, जिससे डॉक्टरों की पंजीकरण प्रक्रिया खतरे में पड़ गई है, जिन्हें ईमानदारी के साथ जनता की सेवा करनी चाहिए.

3. भ्रष्टाचार और आपराधिक सांठगांठ: जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, WBMC के अध्यक्ष सहित कई सदस्य अवैध गतिविधियों के लिए जांच के दायरे में हैं, जिनमें से कुछ सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है और अन्य को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया है. रजिस्ट्रार का अवैध कार्यकाल WBMC में व्याप्त भ्रष्टाचार और आपराधिक सांठगांठ का एक और लक्षण है.

4. कानूनी और चिकित्सा परिणाम: रजिस्ट्रार की अनधिकृत कार्रवाइयों ने सभी पंजीकरण-संबंधी प्रक्रियाओं की वैधता पर संदेह पैदा कर दिया है. इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए भयावह परिणाम हो सकते हैं. डॉक्टरों को अपने पंजीकरण को अदालत में चुनौती मिल सकती है, और मरीज उन चिकित्सा पेशेवरों की योग्यता पर सवाल उठा सकते हैं जिन पर वे भरोसा करते हैं. यह स्थिति पश्चिम बंगाल में कानूनी और चिकित्सा ढांचे दोनों के लिए एक तत्काल खतरा है.

5. तत्काल कार्रवाई की जरूरत: इन महत्वपूर्ण मुद्दों के मद्देनजर, यह जरूरी है कि पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल को बिना देरी के भंग कर दिया जाए. रजिस्ट्रार की कुर्सी पर अवैध कब्जा काउंसिल के भीतर गहरी सड़न का लक्षण है. केवल विघटन और एक नए, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत निकाय की स्थापना के जरिए ही राज्य चिकित्सा पेशे की अखंडता सुनिश्चित कर सकता है और जनता को आगे के नुकसान से बचा सकता है.

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