क्या राहुल गांधी के पास स्टेटहुड लौटाने का पावर है? जम्मू की रैली में अमित शाह का पलटवार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार किया है. अमित शाह ने कहा,’राहुल गांधी कहते हैं कि वे जम्मू-कश्मीर को राज्य (statehood) का दर्जा देंगे. क्या उनके पास ऐसा करने की शक्ति है? मैंने संसद में कहा है कि चुनाव के बाद उचित समय पर राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा.’

अमित शाह ने जम्मू में कहा,’अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर के लोग वोट देने जा रहे हैं. मैं अपने कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि वे सुनिश्चित करें कि विपक्षी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाए. यह चुनाव ऐतिहासिक है. पहली बार जम्मू-कश्मीर के लोग एक ही झंडे की छांव में वोट देने जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में कोई अलग प्रधानमंत्री नहीं होगा.’

गृह मंत्री ने आगे कहा,’मैं चाहता हूं कि आप सभी मतदान के दिन सुबह 11.30 बजे से पहले मतदान करें. नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पत्थरबाजों को रिहा करना चाहते हैं. वे राजौरी और पुंछ में आतंकवाद को पनपने देना चाहते हैं. हमने उपद्रवियों को जेल में डाल दिया है. वे चाहते हैं कि नियंत्रण रेखा के पार व्यापार फिर से शुरू हो. इससे किसे फायदा होगा? हम शांति स्थापित होने तक पाकिस्तान से बात नहीं करेंगे.’

उन्होंने आगे कहा,’वे शंकराचार्य हिल का नाम बदलकर तख्त-ए-सुलेमान रखना चाहते हैं. क्या आप इसकी अनुमति देंगे? तीन परिवारों ने जम्मू-कश्मीर को लूटा है. वे जम्मू को उसके अधिकारों से वंचित करना चाहते हैं. वे जम्मू-कश्मीर के लिए स्वायत्तता चाहते हैं. अब कोई भी ताकत जम्मू-कश्मीर में स्वायत्तता की बात करने की हिम्मत नहीं करेगी.’

दरअसल, राहुल गांधी ने 4 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में कहा था कि जम्मू-कश्मीर से स्टेटहुड छीना गया है, लेकिन हम इसे वापस दिलाएंगे. राहुल ने कहा था,’1947 के बाद से पहली बार एक स्टेट से उनका अधिकार छीना गया है. सिर्फ कांग्रेस पार्टी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड दिया जाए. बीजेपी-संघ कुछ भी कह लें, हम जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनका स्टेटहुड वापस देने जा रहे हैं.’

राहुल ने आगे कहा था,’आपका सिर्फ स्टेट नहीं छीना गया, आपके अधिकार, आपका धन आपसे छीना जा रहा है. 1947 में हमने राजाओं को हटाकर लोकतांत्रिक सरकार बनाई. आज जम्मू कश्मीर में राजा बैठा है. उसका नाम एलजी है. यहां एलजी 21वीं सदी के राजा हैं. वे जो चाहते हैं, करते हैं. यहां के लोगों को न तो रोजगार मिलता है और न ही कोई अन्य लाभ. सरकार यह सब बाहरी लोगों को देती है.’

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