डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेडिंग पार्टनर्स को सीधी चेतावनी… टैरिफ के लिए नहीं चाहिए संसद की मंजूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों को एक नई और बहुत ही कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ कहा है कि उन्हें टैरिफ लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से किसी नई अनुमति की जरूरत नहीं है। ट्रंप के अनुसार, जो देश अमेरिका को दशकों से लूट रहे हैं, उन्हें अब भारी भरकम टैक्स चुकाने के लिए तैयार रहना होगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट के जरिए अपनी मंशा को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति के तौर पर उनके पास टैरिफ लगाने की शक्तियां पहले से ही कई कानूनी रूपों में मौजूद हैं। वे देश अब सावधान रहें जो वर्षों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर केवल अपना स्वार्थ और फायदा सिद्ध कर रहे हैं।

हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ को रद्द करने का एक बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रंप ने इस अदालती फैसले को ‘हास्यास्पद और बहुत ही खराब तरीके से तैयार किया गया’ करार देते हुए इसकी जमकर आलोचना की है। हालांकि, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस फैसले से असल में किसी न किसी रूप में उनके टैरिफ लगाने के अधिकारों की पुष्टि हुई है।

टैरिफ प्रणाली में पैदा हुई ताजा अस्पष्टता और अनिश्चितता के कारण भारत सरकार ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है। भारत ने अपने प्रस्तावित व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की वाशिंगटन जाने वाली उच्च स्तरीय यात्रा को फिलहाल के लिए पूरी तरह स्थगित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बहुत ही गहन चर्चा और आपसी परामर्श के बाद लिया गया है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल को वाशिंगटन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौते की बारीकियों पर चर्चा और बातचीत करनी थी। इस प्रस्तावित समझौते से भारतीय निर्यात पर लगने वाले भारी दंडात्मक टैरिफ में बड़ी कटौती होने की बहुत अधिक उम्मीद जताई गई थी। साथ ही, इस नई व्यवस्था से अमेरिकी उत्पादों के भारतीय बाजार में प्रवेश और आयात में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना थी।

इस पूरे विवाद और तनाव के बीच व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक या बड़ा सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि वे अपने सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ परदे के पीछे से लगातार काम कर रहे हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से नई तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है क्योंकि स्थिति स्पष्ट होने में अभी और समय लग सकता है।

ट्रंप की इस खुली चेतावनी ने वैश्विक बाजार में एक बार फिर से अस्थिरता और बड़े डर का माहौल पैदा कर दिया है। जो देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले का फायदा उठाकर अमेरिका के साथ व्यापारिक खेल खेलना चाहते हैं, उन्हें अब और भी सख्त टैरिफ झेलने होंगे। ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वे अपने दूसरे कार्यकाल में भी संरक्षणवाद की नीति को और अधिक मजबूती से लागू करने वाले हैं।

फिलहाल प्रतिनिधिमंडल की नई यात्रा तिथि तय नहीं की गई है क्योंकि अदालत के फैसले के बाद टैरिफ की स्थिति बिलकुल स्पष्ट नहीं है। भारत और अमेरिका दोनों ही देश अब टैरिफ सिस्टम पर कानूनी स्थिति के पूरी तरह साफ होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब तक यह अनिश्चितता बनी रहेगी तब तक बड़े व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी कठिन नजर आ रहा है।

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