दिल्ली हाईकोर्ट ने डूसू (दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ)चुनाव को लेकर कहा है कि विश्वविद्यालय के परिसर अभी भी छात्र संघों की चुनावी ज्यादतियों से उबर नहीं पाए हैं और बैनर-पोस्टरों तथा कटआउट्स को हटाए न जाने के कारण काफी खराब दिख रहे हैं। साथ ही कोर्ट ने डूसू चुनाव लड़ने वाले छात्रों को पक्षकार बनाते हुए उन्हें कार्यवाही में उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने 27 सितंबर को हुए डूसू के चुनाव में खड़े होने वाले 16 छात्रों को कार्यवाही में पक्षकार बनाया और उन्हें 28 अक्टूबर को कोर्ट के सामने पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है।
याचिकाकर्ता की अपील पर अदालत ने डूसू का चुनाव लड़ने वाले छात्रों भानु प्रताप सिंह, रौनक खत्री, यश पंवार, ऋषभ चौधरी, लोकेश चौधरी, यश नांदल, राहुल सिंह डेढ़ा, अमन कपासिया, दीपिका झा, अमन कपासिया, शिवम मौर्य, हिमांशु नागर, आर्यन मान, ऋषि राज सिंह, राहुल झांसला और प्रियांशु चौधरी को प्रतिवादी बनाया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन्हीं उम्मीदवारों ने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए यूनिवर्सिटी कैम्पस को खराब किया है। जिसके चलते अदालत ने उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय और कॉलेजों के साथ मिलकर कैम्पस परिसर से सभी पोस्टर व भित्तिचित्र हटाने और क्षतिग्रस्त दीवारों को पुनः रंगने का निर्देश दिया। साथ ही हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को यह निर्देश भी दिया कि वह नए प्रतिवादियों को वॉट्सएप और ई-मेल के जरिए सम्पर्क कर 28 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होने के लिए सूचित करे।
हाईकोर्ट ने कहा कि सफाई का काम उम्मीदवार के रूप में खड़े होने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय या कॉलेजों के सहयोग से करना चाहिए। कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को परिसर की सफाई करने और दीवारों की पुताई करने का निर्देश भी दिया।
अदालत ने अपनी चेतावनी दोहराते हुए एकबार फिर कहा कि डूसू चुनाव की मतगणना तब तक नहीं होगी जब तक कि सभी परिसर को गंदा करने वाली सामग्रियां हटाई नहीं जाती और सार्वजनिक संपत्ति की साफ-सफाई नहीं हो जाती।
उधर सुनवाई के दौरान डीयू के दो अलग-अलग कॉलेजों से चुनाव लड़ने वाले दो उम्मीदवारों ने अदालत से वोटों की गिनती कराने और चुनाव परिणामों की घोषणा करने की अनुमति देने का आग्रह करते हुए कहा कि उन्होंने इलाके की सफाई की पहल की है और अन्य छात्रों को भी इसके लिए प्रेरित किया है। अदालत ने दोनों उम्मीदवारों द्वारा की गई कोशिशों की तारीफ करते हुए कहा कि ‘हालांकि फोटोग्राफ और वीडियो से पता चलता है कि परिसर अभी भी काफी बुरी स्थिति में है।’
सुनवाई के दौरान दोनों जजों की बेंच ने कहा, ‘दिल्ली विवि के उत्तरी और दक्षिणी परिसर अभी भी चुनावी ज्यादतियों से उबर नहीं पाए हैं और बड़ी संख्या में पोस्टर/होर्डिंग/बैनर/भित्तिचित्र लगे होने की वजह से वे अभी भी काफी खराब दिख रहे हैं। कई कॉलेजों की चारदीवारी में अभी भी पेंटिंग की जानी है।’
अदालत ने दिल्ली पुलिस, एमसीडी और डीयू को ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय की।
इस मसले को लेकर अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है, जिन्होंने DUSU उम्मीदवारों और सार्वजनिक दीवारों को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने, उन्हें गंदा करने और नष्ट करने में शामिल छात्र संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इससे पहले सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने डूसू चुनाव लड़ने वाले कई उम्मीदवारों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कथित मामले में नोटिस जारी कर अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था।