कोर्ट की कार्यवाही के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिया।

दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान सिंघवी ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष का उद्देश्य सब कुछ फिर से शुरू करना है और इस बात पर जोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21, जो जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है, का अधिक महत्व होना चाहिए। यह ट्रम्प (तुरुप का पत्ता) की तरह रहेगा, साथ ही उन्होंने आगे मजाकिया अंदाज में कहा कि वर्तमान समय में ट्रंप एक खतरनाक शब्द बन गया है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ‘एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 22, धारा 45 PMLA से अधिक महत्वपूर्ण हैं… यह ट्रम्प (तुरुप के पत्ते) की तरह है, ट्रंप आजकल एक खतरनाक शब्द है।’ वरिष्ठ वकील का संदर्भ रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप से था, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए प्रचार कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ को बताया कि सीबीआई ने केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया था, और ट्रायल कोर्ट ने एकतरफा गिरफ्तारी का आदेश पारित किया। उन्होंने यह भी बताया कि कथित शराब नीति घोटाले में केजरीवाल को सीबीआई ने लगभग दो साल तक गिरफ्तार नहीं किया था, लेकिन ईडी द्वारा लाए गए अधिक कठोर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिलने के बाद 26 जून को इंश्योरेंस गिरफ्तारी की गई थी।

जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए जमानत की मांग करते हुए सिंघवी ने तर्क दिया कि केजरीवाल एक संवैधानिक पदाधिकारी हैं, जिनके भागने का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केजरीवाल का नाम सीबीआई की एफआईआर में नहीं था और दोहराया कि उनके भागने का कोई जोखिम नहीं है।

वरिष्ठ वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री समाज के लिए खतरा नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अगस्त 2023 में जो शुरू हुआ था, वह इस साल मार्च में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी का कारण बना।’ सिंघवी ने कहा कि शीर्ष अदालत और एक अधीनस्थ अदालत ने इस मामले में पहले ही उन्हें जमानत दे दी है।

शीर्ष अदालत ने 23 अगस्त को सीबीआई को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी थी और केजरीवाल को जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया था।

केजरीवाल ने जमानत से इनकार किए जाने के खिलाफ और मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के खिलाफ दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली उच्च न्यायालय के पांच अगस्त के आदेश को चुनौती दी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 अगस्त के अपने फैसले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को वैध माना और सीबीआई की कार्रवाई में कोई दुर्भावना नहीं पाई। अदालत ने कहा कि सीबीआई ने दिखाया कि कैसे केजरीवाल, AAP नेता के रूप में, संभावित रूप से गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिन्होंने उनकी गिरफ्तारी के बाद ही गवाही देने का साहस जुटाया।

आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक को 26 जून को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर एजेंसी से जवाब मांगा था।

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