पश्चिम यूपी के शहरों में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह ट्रैफिक कंजेशन है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से किए गए सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आए हैं। अब इस संबंध में ट्रैफिक पुलिस को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस भेजा जा रहा है। हवा की गति कम होने की वजह से धूल और प्रदूषण के सूक्ष्म कण प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। गाजियाबाद में आज वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 277 दर्ज किया गया है। वहीं मेरठ में एक्यूआई 227 रिकॉर्ड हुआ जो खराब श्रेणी में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को सुबह लखनऊ के तालकटोरा क्षेत्र में एक्यूआई 283 दर्ज किया गया। वहीं केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र में 237 और लालबाघ में 257 एक्यूआई दर्ज किया गया।
मेरठ के गंगानगर में सुबह 242, जयभीमनगर में 215 और पल्लवपुरम में 228 एक्यूआई रहा। गाजियाबाद के संजय नगर में 356 एक्यूआई दर्ज किया गया। जबकि इंदिरापुरम में 246, लोनी में 309 और वसुंधरा में 231 एक्यूआई रहा। मुरादाबाद के कांशीरामनगर में 109 और ट्रांसपोर्टनगर में 136 एक्यूआई रहा। जबकि गोरखपुर के एमएमएमयूटी क्षेत्र में 79 एक्यूआई रहा। कानपुर के कल्याणपुर में 166 और नेहरूनगर में 159 एक्यूआई रहा।
वाराणसी के अदर्ली बाजार में 78, भेलूपुर में 69 और मल्दहिया में 75 एक्यूआई रहा। प्रयागराज, बरेली और आगरा में वायु प्रदूषण की स्थिति भी बिगड़ रही है। प्रयागराज के नगर निगम क्षेत्र में सुबह 126 और झूंसी क्षेत्र में 120 एक्यूआई दर्ज किया गया। वहीं आगरा के रोहता में 241, संजय पैलेस में 250, मनोहरपुर में 231, शास्त्रीपुरम में 253 और आवास विकास कॉलोनी में 274 एक्यूआई दर्ज किया गया। बरेली के राजेन्द्र नगर में 79 एक्यूआई दर्ज किया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने सर्वेक्षण किया। इसमें पता चला कि पीक अवधि में खासतौर पर शाम से रात तक लगने वाले जाम की वजह से एक ही समय हजारों वाहनों का धुआं हवा में घुलता है। हालांकि, प्रदूषण कम करने के लिए तेजी से प्रयास हो रहे हैं।