कोल घोटाले में 6 लोगो की संपत्ति जब्त,अटैच प्रॉपर्टी पर ED का कोई अधिकार नहीं

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोयला घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से कुर्क की गई संपत्तियों पर बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कहा कि अटैच प्रॉपर्टी पर ED का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को केस की अंतिम सुनवाई तक संपत्ति के इस्तेमाल की अनुमति दी, हालाँकि अस्थायी अटैचमेंट जारी रहेगा। इस फैसले के साथ 10 याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने पाया कि संपत्ति जब्ती बिना पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य के की गई थी।

किसकी कितनी संपत्ति जब्त?

ED ने 30 जनवरी 2025 तक पीएमएलए, 2002 के तहत कुल 49.73 करोड़ रुपये की 100 से अधिक चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। इनमें प्रमुख याचिकाकर्ताओं की संपत्ति इस प्रकार है:

  • सूर्यकांत तिवारी (मास्टरमाइंड): 18.5 करोड़ रुपये (बैंक बैलेंस, जमीन, वाहन)
  • सौम्या चौरसिया: 12.3 करोड़ रुपये (आभूषण, नकदी, संपत्ति)
  • रजनीकांत तिवारी (सूर्यकांत के भाई): 7.8 करोड़ रुपये (जमीन, वाहन)
  • अनुराग चौरसिया (सौम्या का भाई): 5.2 करोड़ रुपये (बैंक खाते, संपत्ति)
  • समीर विश्नोई: 3.9 करोड़ रुपये (नकदी, वाहन)
  • कैलाशा तिवारी और दिव्या तिवारी: 2.03 करोड़ रुपये (आभूषण, जमीन)

ED ने आरोप लगाया कि सूर्यकांत तिवारी और उनके नेटवर्क ने पिछले शासनकाल में नेताओं व अधिकारियों के साथ मिलकर कोयला ट्रांसपोर्टर्स से 570 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को ऑनलाइन परमिट सिस्टम को ऑफलाइन करने का आदेश जारी किया, जिससे वसूली आसान हुई। इस मामले में दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज है।

कोर्ट में तर्क

याचिकाकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि ED ने केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर संपत्ति जब्त की, बिना ठोस सबूत पेश किए। पांच दिन चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी।

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