ईरान-इजरायल युद्ध का असर: पेट्रोल और LPG के दामों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक बाजार में स्थिरता

पेट्रोल और LPG की कीमतें


ईरान-इजरायल युद्ध से वैश्विक ईंधन बाजार पर असर

नई दिल्ली। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और पीएनजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, globalpetrolprices द्वारा 2 मार्च और 9 मार्च 2026 तक जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

हालांकि, भारत में एलपीजी के दाम 115 रुपये प्रति सिलेंडर तक बढ़ गए हैं, वहीं पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 55 रुपये प्रति लीटर तक महंगी हो गई है। इन बदलावों से यह साफ है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव तो हुआ है, लेकिन अब तक यह उतना गंभीर नहीं दिखा।

पेट्रोल और एलपीजी के दामों में बदलाव

पेट्रोल की कीमतों पर ध्यान दें तो 2 मार्च और 9 मार्च 2026 के बीच ज्यादातर देशों में बहुत छोटा बदलाव देखा गया। उदाहरण के लिए, लीबिया में पेट्रोल की कीमत 2.170 रुपये से बढ़कर 2.173 रुपये प्रति लीटर हो गई, वहीं ईरान में यह 2.631 रुपये से बढ़कर 2.636 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। वेनेजुएला में भी मामूली बढ़ोतरी हुई और कीमत 3.220 रुपये से बढ़कर 3.226 रुपये प्रति लीटर हो गई।

मध्य-पूर्व और तेल उत्पादक देशों में भी पेट्रोल की कीमतें लगभग स्थिर रही हैं। कुवैत में पेट्रोल 31.425 रुपये से बढ़कर 31.511 रुपये प्रति लीटर हुआ, जबकि सऊदी अरब में यह 57.111 रुपये से बढ़कर 57.221 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। ओमान और बहरीन में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय पेट्रोल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं आया है।

एलपीजी की कीमतों पर असर

एलपीजी की कीमतों का विश्लेषण भी इसी दिशा में है। 2 मार्च और 9 मार्च के बीच कई देशों में एलपीजी के दामों में मामूली बदलाव देखा गया। अल्जीरिया में एलपीजी की कीमत 8.438 रुपये से घटकर 8.408 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि अंगोला में कीमत 10.031 रुपये से बढ़कर 10.051 रुपये हो गई। रूस में एलपीजी की कीमत 37.887 रुपये से घटकर 37.286 रुपये प्रति लीटर हो गई, जो कि एक उल्लेखनीय गिरावट मानी जा रही है।

वहीं, अजरबैजान में एलपीजी की कीमत 35.171 रुपये से बढ़कर 37.952 रुपये तक पहुंच गई, जो इस सूची में अपेक्षाकृत बड़ी बढ़त है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति

कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा बाजार अभी स्थिर स्थिति में है। तेल उत्पादक देशों की कीमतें स्थिर रहने से आयात करने वाले देशों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, अगर संकट बढ़ता है, तो पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है।

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