सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की है। बढ़ी हुईं दरें बुधवार, 1 अप्रैल को लागू हो गई हैं।
गौरतलब है कि 20 मार्च को भी इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 22 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ था, जिससे दिल्ली में यह कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये हो गई थी। वहीं, प्रीमियम 95-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत में 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
इंडस्ट्रियल डीजल को एचएसडी भी कहा जाता है, जो सीधे कमर्शियल यूनिट्स को थोक में बेचा जाता है। इस डीजल की कीमत में 28.22 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। यह करीब 25 प्रतिशत से अधिक महंगा हो गया है। नए रेट के मुताबिक अब इंडस्ट्रियल डीजल 109.59 रुपये से बढ़कर 137.81 रुपये प्रति लीटर हो गया है।ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के अनुसार, फर्नेस ऑयल (FO) की कीमत में भी 23.77 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है।
सप्लाई पर कोई असर नहीं: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि इंडस्ट्रियल और थोक ग्राहकों को फ्यूल की सप्लाई सुचारू रूप से जारी है और उपलब्धता में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आई है।
आम उपभोक्ताओं के लिए राहत: आम पेट्रोल और डीजल उपभोक्ताओं के लिए पंप कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नियमित ग्राहकों को अभी भी पुरानी दरों पर ही तेल मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को 109 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं, जिसका मुख्य कारण ईरान में बढ़ता संकट और युद्ध की स्थिति बताई जा रही है।
सरकार का बड़ा कदम
कच्चे तेल की असामान्य रूप से बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने घरेलू बाजार में डीजल और विमानों में इस्तेमाल किए जाने वाले फ्यूल एटीएफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है।
रिफाइनरी पूरी क्षमता से चल रही हैं: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल की सप्लाई की मौजूदा स्थिति पर अपडेट देते हुए बताया कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और पेट्रोल व डीजल का पर्याप्त भंडार बनाए रखा जा रहा है।
अफवाहों से बचने की अपील: अधिकारियों ने बताया कि कुछ इलाकों में अफवाहों के कारण लोग घबराकर पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं। इससे पंपों पर भीड़ और असामान्य रूप से अधिक बिक्री देखी गई है। हालांकि, नियमित खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सचिव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर जोर दिया कि वे एलपीजी को प्राथमिकता दें, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक क्षेत्रों को बिना किसी रुकावट के सप्लाई सुनिश्चित की जा सके। राज्यों को जमाखोरी, ईंधन के गलत इस्तेमाल और गलत सूचनाओं के प्रसार पर सख्त निगरानी रखने की सलाह भी दी गई, ताकि अनावश्यक घबराहट न फैले।