हाथी-ड्रैगन की नई दोस्ती? ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने दिया बीजिंग को मौका

चीन और भारत के बीच रिश्ते ज्यादातर समय कमजोर और बेहद शत्रुतापूर्ण रहे हैं, खासकर जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसा के बाद. क्या ट्रंप की टैरिफ नीति से इसमें बदलाव आने वाला है?

दशकों की राजनीतिक और कूटनीतिक रस्साकशी जिस काम को अंजाम नहीं दे पाई, संभवतः वह काम ट्रंप ने पिछले एक सप्ताह में कर दिखाया है। भारत और चीन एक साथ आते हुए प्रतीत हो रहे हैं, जैसा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पिछले महीने कहा था कि “ड्रैगन और हाथी को एक साथ नचाने” के लिए दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

चीन पर अमेरिकी राष्ट्रपति टैरिफ वाला बम फोड़ रहे हैं. बीजिंग ने ट्रंप के पहले चरण के 34 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ का जवाब ठीक उतने ही टैरिफ लगाकर दिया तो अमेरिका ने 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ और लाद दिया. इससे चीनी सामानों पर अमेरिका में कुल टैरिफ अब 104 प्रतिशत पर पहुंच गया है. साफ दिख रहा है कि दो वैश्विक दिग्गजों के बीच बिना फुल स्केल का व्यापार युद्ध शुरू हो गया है, जिसमें चीन ने “अमेरिकी आक्रामकता … से अंत तक” लड़ने की कसम खाई है.

दिल्ली स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने एक्स पर लिखा, “चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते आपसी फायदे पर टिके हैं। अमेरिका द्वारा टैरिफ के गलत इस्तेमाल के सामने, जो खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को विकास के अधिकार से वंचित करता है, इस क्षेत्र के सबसे बड़े विकासशील देशों को एकजुट होना चाहिए…

” इस विस्तृत पोस्ट में ट्रंप को चेतावनी भी दी गई थी, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा गया था, “…व्यापार और टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। सभी देशों को व्यापक बातचीत के सिद्धांत पर कायम रहना चाहिए, सच्चे बहुपक्षवाद को अपनाना चाहिए, और एकतरफावाद तथा संरक्षणवाद के सभी रूपों का मिलकर विरोध करना चाहिए।”

चीनी दूतावास ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की तुलना में अपनी ताकत की स्थिति को भी दिखाया. पोस्ट में बताया गया कि चीन औसतन वार्षिक वैश्विक विकास में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देता है. मिस यू की पोस्ट में कहा गया, “हम बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की सुरक्षा के लिए बाकी दुनिया के साथ काम करना जारी रखेंगे.”

भारत ने फिलहाल इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। प्रवक्ता यू का यह पोस्ट चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हालिया बयान के बाद आया है। 1 अप्रैल को शी जिनपिंग ने बीजिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कहा था कि भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए। बीजिंग की ओर से इतने उच्च स्तर से सहयोग की बात करना महत्वपूर्ण है, भले ही यह स्पष्ट हो कि इसके पीछे मुख्य कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का प्रभाव है।

गौरतलब है कि चीन और भारत के बीच संबंध ज्यादातर समय कमजोर और अत्यधिक शत्रुतापूर्ण रहे हैं, विशेष रूप से जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से।

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