नाराज सैलजा और मायावती की एंट्री, हरियाणा में दलितों के बिगड़ते समीकरण क्‍या कांग्रेस का खेल बिगाड़ेंगे?

हरियाणा विधानसभा चुनाव में मुख्य लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. लेकिन, बीच में कुछ ऐसे राजनीतिक तत्वों की घुसपैठ हो गई है, जो दोनो दलों में से किसी के लिए भी ठीक नहीं माना जा सकता है. ऐसे तत्वों से दोनो पक्षों को नुकसान हो सकता है, ये बात अलग है कि कौन ज्यादा नुकसान उठाता है, और कौन मजबूती से अपने को बचा लेने में सफल रहता है. 

बीएसपी की तरफ से आकाश आनंद तो हरियाणा में माहौल बना ही चुके थे, अब मायावती की एंट्री हुई है – और ये ऐसे वक्त हो रही है, जब कांग्रेस की कमजोर कड़ी कुमारी सैलजा की नाराजगी भी सरेआम हो चुकी है, भले ही वो कितनी भी सफाई क्यों न देती फिरें. 

आबादी के हिसाब से देखें तो दलित वोटर सबसे बड़े किंगमेकर नजर आते हैं, बशर्ते वे कहीं एक जगह पोल हों. हरियाणा की कुल आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 20.2 फीसदी है. और, कुल 17 सीटें एससी वोटर के लिए आरक्षित हैं. शहरी इलाकों के मुकाबले गांवों में ये आबादी ज्यादा है.

मुश्किल ये है कि दलित वोटर पर मायावती का प्रभाव यूपी की ही तरह हरियाणा में भी काफी घटा है. 2009 में बीएसपी का वोट शेयर 6.7 फीसदी था, लेकिन 2019 में घटकर वो 4.2 पर पहुंच गया था. बीएसपी जहां हरियाणा की 37 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, INLD 53 सीटों पर चुनाव मैदान में है. विधानसभा की 20 सीटें ऐसी भी हैं जहां चंद्रशेखर आजाद ने भी अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं, जबकि 70 सीटों पर दुष्यंत चौटाला चुनाव लड़ रहे हैं. 

बीएसपी के युवा चेहरे आकाश आनंद हरियाणा में कांग्रेस को राहुल गांधी के आरक्षण पर बयान से लेकर कुमारी सैलजा के खिलाफ बने माहौल को लेकर पहले से ही घेर रहे हैं. अब मायावती भी कहने लगी हैं, कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियां शुरू से ही दलित आरक्षण के भी विरुद्ध रही हैं… राहुल गांधी ने तो विदेश में जाकर इसको खत्म करने का ही ऐलान कर दिया है… ऐसी संविधान, आरक्षण व SC, ST, OBC विरोधी पार्टियों से ये लोग जरूर सचेत रहें.

और इसके साथ ही कुमारी सैलजा को बीएसपी में आ जाने की सलाह दी जाने लगी है. बीजेपी की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भी ऐसी ही पेशकश कर चुके हैं. विधानसभा का टिकट न मिलने से कुमारी सैलजा नाराज तो हैं, लेकिन कह रही हैं, सैलजा कांग्रेस में थी… कांग्रेस में है, और कांग्रेस में रहेगी… कांग्रेस मेरा कमिटमेंट है… कांग्रेस मेरी विचारधारा है… कांग्रेस हमारा नेतृत्व है. 

बीजेपी और कांग्रेस के अलावा अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी मुकाबले में कूद पड़ी है. और, दो गठबंधन भी अलग से चुनाव मैदान में हैं. एक गठबंधन है, दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी और नगीना से सांसद भीम आर्मी वाले चंद्रशेखर आजाद के बीच है. दूसरा गठबंधन चौटाला परिवार की पार्टी INLD ने यूपी की बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती के साथ किया है. 

जेल से जमानत पर छूटने के बाद से अरविंद केजरीवाल भी एक्टिव हैं. कहने लगे हैं हरियाणा में जिसकी भी सरकार बने, उनकी मर्जी के बगैर नहीं बन सकती. हर सूरत में किंगमेकर तो आम आदमी पार्टी ही रहेगी. 

देखा जाये तो अरविंद केजरीवाल और मायावती दोनो की राजनीतिक सक्रियता एक ही दिशा में काम कर रही है, और दोनो कांग्रेस के लिए ही नुकसानदेह साबित होंगे – फायदा बीजेपी को होगा. 

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