लामनी बर्ड पार्क
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित जगदलपुर का लामनी बर्ड पार्क एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बुधवार का दिन बेहद खास बन गया, जब इस खूबसूरत एवीयरी में दो बेहद दुर्लभ और आकर्षक विदेशी पक्षियों का आगमन हुआ। ब्लू-एंड-गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट के आने से पार्क का माहौल और भी रंगीन व जीवंत हो गया है।
इन नए मेहमानों के स्वागत के लिए पार्क में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे, पर्यटक और पक्षी प्रेमी इन खूबसूरत पक्षियों को करीब से देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
विदेशी पक्षियों से बढ़ी जैव विविधता
लामनी बर्ड पार्क पहले से ही अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। अब इन विदेशी पक्षियों के शामिल होने से पार्क का पक्षी संग्रह और भी खास हो गया है।
नए पक्षियों के आगमन से:
- पार्क की आकर्षण क्षमता में बढ़ोतरी
- पर्यटन को मिलेगा नया प्रोत्साहन
- बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति जागरूकता
ब्लू-एंड-गोल्ड मकाऊ: रंगों का जादू
ब्लू-एंड-गोल्ड मकाऊ, जिसे आरा अरारौना भी कहा जाता है, मूल रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों और सवाना क्षेत्रों का निवासी है। यह तोता अपने चटख रंगों और बुद्धिमत्ता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं:
- ऊपरी हिस्सा गहरा नीला, पेट और छाती सुनहरा-पीला
- सिर पर हरे रंग की आभा
- 34 से 36 इंच लंबाई
- 41 से 45 इंच तक पंखों का फैलाव
- इंसानों की तरह बोलने और नकल करने की क्षमता
इनका आकर्षक रंग संयोजन देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
अफ्रीकन ग्रे पैरेट: बुद्धिमत्ता का बादशाह
अफ्रीकन ग्रे पैरेट को दुनिया के सबसे बुद्धिमान पक्षियों में गिना जाता है। यह अपनी बेहद सटीक आवाज़ नकल करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
खास बातें:
- शब्दों और वाक्यों को आसानी से दोहराने की क्षमता
- बच्चों के लिए मनोरंजन और सीख का माध्यम
- सामाजिक और भावनात्मक रूप से संवेदनशील पक्षी
विशेषज्ञों की राय
बस्तर वनमंडलाधिकारी श्री उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि ये पक्षी पालतू रूप में भी बहुत लोकप्रिय हैं, क्योंकि:
- ये बेहद सामाजिक और चंचल होते हैं
- मालिकों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाते हैं
- मजबूत चोंच के कारण मेवे आसानी से तोड़ सकते हैं
हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि इन पक्षियों को विशेष देखभाल, संतुलित आहार और पर्याप्त ध्यान की आवश्यकता होती है।
लंबी उम्र, बड़ी जिम्मेदारी
इन विदेशी पक्षियों की सबसे खास बात यह है कि इनकी आयु 60 से 80 वर्ष तक हो सकती है। ऐसे में इनका संरक्षण और देखभाल एक दीर्घकालिक जिम्मेदारी होती है, जिसे लामनी बर्ड पार्क पूरी संवेदनशीलता के साथ निभा रहा है।
पर्यटन को मिलेगा नया पंख
लामनी बर्ड पार्क में इन रंग-बिरंगे और बातूनी पक्षियों के आगमन से उम्मीद की जा रही है कि:
- स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
- बच्चों और परिवारों की संख्या बढ़ेगी
- जगदलपुर की पहचान एक प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में मजबूत होगी