होली पर भी वनों की सुरक्षा में जुटे रहे वनकर्मी: सोनाखान के जंगलों में आग पर काबू

वन सुरक्षा


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भारत में वनों की अहमियत सिर्फ उनकी सुंदरता और जैव विविधता तक सीमित नहीं है, बल्कि ये पर्यावरण संतुलन, जलवायु, और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में वनों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग निरंतर प्रयासरत है।

छत्तीसगढ़ के वनकर्मी: त्योहारों में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए

होलिका दहन और होली के रंगों में रंगे प्रदेश के लोग जब उत्सव में मग्न थे, तो छत्तीसगढ़ के वनकर्मी जंगलों की सुरक्षा में जुटे हुए थे। खासकर, सोनाखान के जंगलों में आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने तत्परता से कार्यवाही शुरू की और आग पर काबू पाया।

सोनाखान के जंगलों में लगी आग

बीती रात, बलौदाबाजार वनमंडल के सोनाखान परिक्षेत्र में कसडोल-कोठारी मार्ग पर देवतराई और पौड़ी के बीच स्थित जंगल में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। आग की लपटें फैलने से पहले ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया।

प्रभावी कार्यवाही में वन विभाग की टीम का योगदान

आग की स्थिति को देखते हुए, वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने मौके पर पहुंचकर टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने फायर लाइन बनाकर, फायर बीटर और अन्य संसाधनों का उपयोग करते हुए आग को फैलने से रोका। यह कार्रवाई जंगल और उसके आसपास के क्षेत्र को और बड़े नुकसान से बचाने के लिए बेहद प्रभावी साबित हुई।

स्थानीय रेंज अधिकारी और बीट प्रभारियों की भूमिका

स्थानीय रेंज अधिकारी और बीट प्रभारियों ने भी अपनी टीम के साथ मिलकर आग पर काबू पाया। उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग को सीमित किया और वन्यजीवों और वनों को होने वाली संभावित क्षति को रोका।

वन विभाग का उद्देश्य

वन विभाग का प्रमुख उद्देश्य बेहतर प्रबंधन, जागरूकता, और जनसहभागिता के माध्यम से वनों को आग से बचाना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है। इस तरह की घटनाओं से यह सिद्ध होता है कि वन विभाग केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगलों के सुरक्षा कार्यों में हर वक्त तत्पर रहता है।

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