इंदौर में 40 लाख के नकली नोट बरामद: पुलिस ने असली बताकर खपाने का किया भंडाफोड़

इंदौर, इंदौर में पलासिया पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो कि बच्चों के खेलने में इस्तेमाल होने वाले 500-500 रुपए के नकली नोटों को असली बताकर लोगों को थमा देते थे। इसके लिए आरोपी जो शातिर तरीका अपनाते थे, उसे देखकर पुलिस भी हैरान है। पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने इन आरोपियों को ढूंढा और फिर जाल बिछाकर गिरोह के दो आरोपियों को दबोच लिया। आरोपियों से पुलिस ने 40 लाख रुपए के नकली नोटों की 80 गड्डियां और इनमें से हर गड्डी पर लगे पांच-पांच सौ रुपए के 40 हजार रुपए के असली नोट भी बरामद किए हैं।

मामले की जानकारी देते हुए पुलिस विभाग के एडिशनल डीसीपी राम स्नेही मिश्रा ने बताया कि थाना पलासिया पुलिस की साइबर मॉनिटरिंग डेस्क द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप पर देश विरोधी गतविधियों के संबंध मे सतत निगाह रखी जा रही थी। इसी बीच टीम को एक ऐसे विज्ञापन की जानकारी लगी जिसमें नकली नोट की खरीद-फरोख्त का ऑफर दिया जा रहा था। इसके बाद पुलिस द्वारा विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर के माध्यम से वॉट्सएप से आरोपियों से सम्पर्क किया गया।

पुलिस ने ग्राहक बनकर बात की, जिसके बाद सामने वाले शख्स ने मैसेज कर नकली नोट लेकर आने की बात कही और 1 लाख के बदले 4 लाख रुपए के नोट देने के बारे में बताया। वही जब आरोपी नकली नोट लेकर बताई गई जगह पर पहुंचे पुलिस ने घेराबंदी कर दो आरोपियों को पकड़ लिया।

आरोपियों की जानकारी देते हुए एडिशनल डीसीपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक का नाम प्रथमेश येवतकर है, जो कि महाराष्ट्र के जलगांव का रहने वाला है, वहीं दूसरे आरोपी का नाम दीपक कौशल है। प्रथमेश महाराष्ट्र के एक अन्य शख्स के माध्यम से दीपक के सम्पर्क में आया था और नकली नोट खपाने की नीयत से किसी से संपर्क किया था। वहीं पर हमारी टीम ने इन दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया।

इंदौर की पलासिया पुलिस ने पकड़े 40 लाख के नकली नोट, एक लाख के बदले देते थे चार से पांच लाख के नकली नोट।

नकली नोट खपाने का तरीका जान पुलिस भी रह गई हैरान

पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से लगभग 40 लाख रुपए के नकली नोट बरामद हुए हैं। उनके पास से बरामद 80 गड्डियों में ऊपर जो नोट लगे हैं, वो असली हैं, जो कि लगभग 8 हजार रुपए होते हैं, जबकि गड्डी के बाकी नोट नकली हैं। पुलिस के मुताबिक ये वही नोट हैं, जो कटलरी दुकान पर मिलते हैं और जिन्हें बच्चे चिल्ड्रन बैंक में खेलने में इस्तेमाल करते हैं।

अधिकारी ने आगे कहा, ‘इनकी नोट खपाने की तकनीक है, वह बहुत ही खतरनाक है। इन लोगों ने वैसे ही गड्डियां बनाई हैं, जैसी बैंक में बनाई जाती हैं। लोगों को बेवकूफ बनाने और उन्हें इस बात का झांसा देने के लिए कि गड्डियों के सारे नोट असली हैं, ये लोग ब्लेड से चीरा लगाते हैं, जहां पर चीरा लगाते हैं, वहां पर एक नोट बाहर निकला रहता है, और ये लोग उसी को खींचकर बताते हैं कि देखिए ये 10 लाख के पूरे बंडल से मैंने बीच में से एक नोट निकाला है, जो कि असली है। ताकि उस आदमी को भरोसा हो जाए कि बंडल के सभी नोट असली ही हैं।’

शक हुआ तो आरोपियों ने तीन बार चेक किया, तब जाकर भरोसा किया

पुलिस ने कहा कि हमारे लोगों के द्वारा ही बहुत कोशिशें करके आरोपियों से संपर्क किया गया था। आरोपियों ने तीन बार इस बात को कन्फर्म करने की कोशिश की कि कहीं वे किसी जाल में तो नहीं फंस रहे हैं। लेकिन हमारी टीम के एक्सपर्ट लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए उन्हें उन्हीं के जाल में फंसाकर दबोच लिया। आगे उन्होंने कहा, ‘ये लोग 1 लाख रुपए के असली नोट देने के बदले 4 लाख रुपए के नोट देने की बात कहते थे। ये सामने वाले को यह बोलकर झांसा देते थे कि ये सेकेंड ग्रेड के नोट हैं, नकली नहीं हैं। जहां पर नोट छपते हैं, वहां पर जो नोट थोड़े खराब हो जाते हैं, ये वही हैं, लेकिन नकली नहीं है। जबकि किसी और से बोलते थे कि हमारे पास बहुत से नोट हैं, उसे खपाना हैं। इस कारण से हम दे रहे हैं। ‘

पुलिस ने बताय कि आरोपी नकली नोट को असली बताकर लोगों को खपाते थे। इनके द्वारा जो सबसे शातिर तकनीक अपनाई जा रही थी, वह यह कि जब ये 10 लाख के नोट की गड्डी में बीच में ब्लेड मारकर एक नोट असली निकालते थे तो किसी को भी भरोसा हो जाता था। फिलहाल पुलिस आगे की जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने फिलहाल 25-50 हजार रुपए खपाने की बात कही है जो कि पुलिस के गले नहीं उतर रहे हैं। इसके अलावा इनके द्वारा अन्य वारदातें करना भी प्रतीत हो रहा है। इस बारे में भी पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है।

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