“बिलासपुर में सरकारी जमीन का फर्जी नामांतरण: सरपंच, कोटवार के जाली दस्तखत, पटवारी पर गंभीर सवाल!”

फर्जी नामांतरण


बिलासपुर में सरकारी जमीन का फर्जी नामांतरण: पटवारी, सरपंच और कोटवार के जाली दस्तखत

बिलासपुर/पचपेड़ी: बिलासपुर जिले के पचपेड़ी क्षेत्र के केवटाडीह टांगर ग्राम पंचायत में सरकारी जमीन के कथित फर्जी नामांतरण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जमीन माफिया और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज किया गया है।

आरोप और जाली दस्तावेज़

ग्रामीणों का कहना है कि पचपेड़ी के इस गांव में करीब 3.30 एकड़ सरकारी जमीन को पटवारी शैलेन्द्र टंडन ने डिजिटल हस्ताक्षर से बटांकन कर खसरा क्रमांक 31 को विभाजित किया और उसे खसरा क्रमांक 31/3 बना दिया। इस प्रक्रिया के जरिए उक्त जमीन को निजी व्यक्ति के नाम कर दिया गया, जबकि यह जमीन 31 अगस्त 1985 को तत्कालीन कलेक्टर न्यायालय, बिलासपुर द्वारा निरस्त घोषित की जा चुकी थी।

यहां तक कि नामांतरण की प्रक्रिया में कई फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया गया है। आरोप है कि 20 फरवरी 1995, 12 मार्च 2001, 16 मार्च 2007 और 23 सितंबर 2012 की तारीखों में फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों, सरपंच और कोटवार के जाली दस्तखत और अंगूठे भी इन दस्तावेजों में लगाए गए हैं, जो इस मामले को और भी संदिग्ध बनाते हैं।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई का न होना

ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में तीन बार की है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस फर्जी नामांतरण के जरिए सरकारी जमीन का गलत तरीके से फायदा उठाया जा रहा है। बताया गया है कि इस जमीन पर अब धान बेचा जा रहा है और सरकारी भूमि को गिरवी रखकर ग्रामीण बैंक चिल्हाटी से लोन लिया गया है, जिससे आर्थिक लाभ लिया जा रहा है।

अन्य संदिग्ध मामले

ग्रामीणों का कहना है कि पचपेड़ी और मस्तूरी क्षेत्र में इस प्रकार के कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम पर कर दिया गया है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं और प्रशासन इस पर नज़रअंदाज़ कर रहा है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, इस जमीन को फिर से शासन के नाम पर दर्ज किया जाए ताकि इस गलत कार्य को सही किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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