बायोफ्लॉक तकनीक
📰 आर्टिकल (400+ शब्द):
छत्तीसगढ़ शासन की किसान-हितैषी योजनाएं और आधुनिक कृषि तकनीकें आज ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल रही हैं। खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अब किसान नवाचार और तकनीक के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम माजा निवासी किसान कैलाश पैकरा इसकी एक प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरे हैं, जिन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
🌾 परंपरागत खेती से आधुनिक सोच की ओर
कैलाश पैकरा पहले केवल धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर थे, लेकिन सीमित आय के कारण उन्होंने कुछ नया करने का निर्णय लिया। इसी क्रम में उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क किया और शासन की बायोफ्लॉक योजना की जानकारी प्राप्त की। सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग ने उनकी सोच को नई दिशा दी।
💰 8.40 लाख की सब्सिडी से बदली तस्वीर
शासन की योजना के तहत श्री पैकरा ने लगभग 14 लाख रुपये की लागत से मत्स्य पालन की शुरुआत की, जिसमें उन्हें 8.40 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। उन्होंने अपने 32×32 डिसमिल क्षेत्र में आधुनिक तालाब और बायोफ्लॉक सिस्टम तैयार किया, जिससे कम जगह और कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो सका।
🐟 बायोफ्लॉक तकनीक की खासियत
बायोफ्लॉक तकनीक आज मत्स्य पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो रही है। इस तकनीक के प्रमुख लाभ हैं:
- कम पानी में अधिक मछली उत्पादन
- सीमित स्थान में व्यवसाय की शुरुआत
- प्राकृतिक तरीके से मछलियों की वृद्धि
- सालभर निरंतर आय की संभावना
वर्तमान में कैलाश पैकरा के फार्म में लगभग 10 हजार मछलियां हैं, जिनमें:
- लगभग 7 हजार तिलपिया
- रोहू
- कतला
- मृगल
- रूपचंद
शामिल हैं। प्राकृतिक प्रजनन के कारण मछलियों की संख्या और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
📈 बाजार की चिंता नहीं, सीधी बिक्री
श्री पैकरा बताते हैं कि उन्हें मछलियों को बेचने के लिए बाजार तक नहीं जाना पड़ता। व्यापारी स्वयं उनके फार्म पर पहुंचकर मछलियां खरीद लेते हैं, जिससे समय और परिवहन खर्च दोनों की बचत होती है।
- थोक मूल्य: 150–160 रुपये प्रति किलोग्राम
- फुटकर मूल्य: 150–200 रुपये प्रति किलोग्राम
इससे उन्हें नियमित और स्थिर आय प्राप्त हो रही है।
🙏 शासन के प्रति आभार, किसानों के लिए प्रेरणा
अपनी सफलता का श्रेय देते हुए कैलाश पैकरा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें आत्मनिर्भर किसान बनाया है।
🌱 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती
कैलाश पैकरा की सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी बायोफ्लॉक तकनीक और आधुनिक मत्स्य पालन की ओर प्रेरित हो रहे हैं। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।