“लेमनग्रास की खुशबू से बदली किस्मत: छत्तीसगढ़ की महिलाएं कमा रहीं लाखों, आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं”

लेमनग्रास की खेती


लेमनग्रास की खेती: महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई इबारत

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं की आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बनती जा रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा क्षेत्र में महिलाओं ने लेमनग्रास की खेती के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल प्रस्तुत किया है।

यह सफलता छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की अभिनव पहल का परिणाम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है।


पंचायत की खाली जमीन बनी आय का साधन

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में एक कन्वर्जेंस मॉडल तैयार किया गया। इसके तहत—

  • पंचायतों की खाली पड़ी भूमि
  • औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती
    के लिए उपयोग में लाई गई।

इस पहल को जिला प्रशासन का भी सहयोग मिला, जिसमें डीएमएफ फंड के माध्यम से आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए।


156 महिलाएं, 50 एकड़ भूमि और नई उम्मीद

मरवाही ब्लॉक के ग्राम पंचायत सेखवा अंतर्गत पथर्रा गांव में—

  • पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई 50 एकड़ भूमि पर
  • 10 महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी
  • 156 महिलाएं

सामूहिक रूप से लेमनग्रास की खेती कर रही हैं। यह परियोजना महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है।


खेती से तेल उत्पादन तक मिला पूरा प्रशिक्षण

महिलाओं की सफलता के पीछे विशेषज्ञ प्रशिक्षण की अहम भूमिका रही। बोर्ड द्वारा महिलाओं को—

  • मृदा परीक्षण
  • खेत की तैयारी
  • जीवामृत निर्माण
  • रोपण तकनीक
  • सिंचाई प्रबंधन
  • फसल कटाई
  • और डिस्टीलेशन यूनिट से तेल निकालने

की संपूर्ण जानकारी दी गई।
इसके साथ ही महिलाओं को अध्ययन भ्रमण भी कराया गया, जिससे वे सफल मॉडलों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।


डिस्टीलेशन यूनिट और स्लिप्स निःशुल्क

बोर्ड ने महिलाओं को आर्थिक बोझ से मुक्त रखने के लिए—

  • 50 एकड़ क्षेत्र में डिस्टीलेशन यूनिट स्थापित करवाई
  • लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क उपलब्ध कराईं

महिला समूहों ने लगभग चार माह तक मेहनत कर—

  • जुताई
  • सिंचाई
  • निराई-गुड़ाई
  • फसल सुरक्षा

के कार्य किए, जिसके बाद तेल उत्पादन शुरू हुआ।


बाजार की चिंता नहीं, पहले से हुआ अनुबंध

महिलाओं को उत्पादन के बाद बाजार खोजने की परेशानी न हो, इसके लिए बोर्ड ने पहले ही—

  • लेमनग्रास तेल खरीदने वाले संस्थानों से अनुबंध करा दिया।

इससे—

  • उत्पादन के तुरंत बाद तेल का विक्रय संभव हुआ
  • बीते एक वर्ष में दो फसल कटाई के बाद
  • लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का तेल विक्रय किया जा चुका है।

आय में वृद्धि, आत्मनिर्भर बनी महिलाएं

लेमनग्रास की खेती से—

  • महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई
  • वे अब अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं
  • परिवार और समाज में उनका आत्मविश्वास और सम्मान बढ़ा है

यह मॉडल अब अन्य गांवों और जिलों की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है।

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