एशियाई शूटिंग चैम्पियनशिप में जीता पहला अंतरराष्ट्रीय पदक

लोन पर राइफल खरीदकर शूटिंग शुरू करने वाली सिटी की निशानेबाज अनन्या नायडू के कदम अब चांद की ओर बढ़ गए हैं। मॉडलिंग में करिअर बनाने का सपना छोड़ 8 साल की कड़ी मेहनत, लोगों के तानों को नजरअंदाज कर आज खुद का एक आसमान बनाने में जुटीं अनन्या ने पहला इंटरनेशनल पदक जीतकर नागपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने में सफलता पाई है। कजाकिस्तान में चल रही 16वीं एशियाई शूटिंग चैम्पियनशिप में शुक्रवार को अनन्या ने 10 मीटर एयर राइफल महिला टीम इवेंट में भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

भारतीय टीम में अनन्या के साथ एलावेनिल वलारिवान, मेहुली घोस शामिल थीं. भारतीय टीम 1891 पॉइंट के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि चीन की टीम ने 1902 पॉइंट के साथ गोल्ड मेडल जीता। वहीं कोरिया की टीम ने 1897.5 पॉइंट के साथ सिल्वर पदक पर कब्जा जमाया। कजाकिस्तान के शिमर्केट में 16 से 30 अगस्त तक आयोजित की जा रही इस एशियाई शूटिंग चैम्पियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन अपेक्षा अनुसार चल रहा है. अनन्या ने शुक्रवार को व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में भी हिस्सा लिया। हालांकि इसमें 3 के अंतर से फाइनल राउंड में जगह बनाने से चूक गई।

630 अंक का किया स्कोर

मैच में अनन्या ने कुल 630 अंक का स्कोर किया. 6 राउंड तक चले मुकाबले के पहले राउंड में अनन्या ने 103.6 का स्कोर किया जो राउंडवार बेहतर प्रदर्शन में बदलता गया। दूसरे राउंड में 104.5, तीसरे में 104.4, चौथे में 105.4, 5वें में 106.7 और अंतिम व छठवें राउंड में अनन्या ने 105.4 का स्कोर कर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

राइफल ही मेरी सच्ची दोस्त : अनन्या

ईश्वर देशमुख कॉलेज की प्राचार्य शारदा लोकेश नायडू की बेटी मेडिकल चौक निवासी अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज अनन्या ने मुकाबले के बाद कहा भारत के लिए पदक जीतना सपना सच होने जैसा है।आज मुझे अत्यंत खुशी है। मैं व्यक्तिगत श्रेणी में 3 से पीछे रह गई। ओलम्पिक में पदक जीतना मेरा अंतिम लक्ष्य है। मैं इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर अपनी तैयारी कर रही हूं, जबसे मॉडलिंग का सपना छोड़ राइफल हाथ में थामी है तब से ही यह मेरी सच्ची दोस्त है। बिना मेहनत के लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता। पहले अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के पीछे मेरी 8 साल की कड़ी मेहनत, धैर्य, शारीरिक मेहनत और एकाग्रता है. मेरी कोच अंजली भागवत के द्वारा सिखाई गई बारीकियों से मैं लगातार आगे बढ़ रही हूं।

नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट बनते ही बदल गया सबकुछ

  • 2016 में अनन्या ने बिना भागदौड़ वाले खेल के रूप में शूटिंग में भविष्य बनाने का सपना संजोया।
  • 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में प्रैक्टिस शुरू की, लोन पर पहली राइफल खरीदी। नागपुर में बेहतर कोचिंग की कमी खली तो 2022 में पुणे में अंतरराष्ट्रीय शूटर
  • अंजली भागवत के पास कोचिंग के लिए चली गई।
  • 30 दिसंबर 2024 को वे नेशनल में पहला गोल्ड मेडल जीतकर नागपुर की पहली निशानेबाज बनीं।
  • 7 से 15 जून 2025 तक जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप के लिए पहली बार भारतीय टीम का हिस्सा बनीं।
  • 22 अगस्त 2025 को भारत के लिए पहला एशियाई कांस्य पदक जीता।

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