“मछुआरे का बेटा अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप को ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में स्वर्ण दिलाया!”

अब्दुल फताह स्वर्ण पदक


अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप के एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा

रायपुर: अब्दुल फताह, जो ज़्यादातर रातें समुद्र में मछली पकड़ने में बिताते हैं, ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में लक्षद्वीप का नाम रोशन करते हुए 7.03 मीटर की शानदार छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। इस ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ़ लक्षद्वीप के खेल जगत को नया मुकाम दिया, बल्कि यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए गर्व का क्षण भी था।

एक मछुआरे के बेटे का सपना:

अब्दुल फताह ने अपनी कड़ी मेहनत और जुनून के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। मछुआरे परिवार में जन्मे फताह ने शुरू में फुटबॉल खेला, लेकिन एक दिन उनके जीवन में एथलेटिक्स की ओर मोड़ आया। एक इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान कोच मोहम्मद कासिम ने उनकी दौड़ने की काबिलियत देखी और उन्हें एथलेटिक्स में उतरने की सलाह दी। इसके बाद, फताह ने लॉन्ग जंप और 100 मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू की और जल्द ही अपनी कड़ी मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त की।

खेलों के प्रति समर्पण:

अब्दुल फताह के लिए यह सफर आसान नहीं था। मछली पकड़ने के काम के साथ-साथ, वे हर सुबह अपने ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकलते थे। उनका कहना है, “हमारे परिवार के लिए मछली पकड़ना ही आमदनी का एकमात्र ज़रिया है, लेकिन मैंने खेल को अपनी पहचान बनाने के लिए अपना जुनून बना लिया है।” अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में मदद करते हुए फताह ने हमेशा यह संतुलन बनाए रखा।

ऐतिहासिक स्वर्ण पदक:

अब्दुल फताह की ट्रेनिंग के परिणामस्वरूप, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में उन्होंने 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह लक्षद्वीप के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि यह प्रदेश का पहला स्वर्ण पदक था। इस सफलता पर लक्षद्वीप के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने कहा, “यह लक्षद्वीप के लिए गर्व की बात है कि हमारे एथलीट ने 7 मीटर की छलांग पार की।”

खेल के विकास के लिए लक्षद्वीप का योगदान:

लक्षद्वीप, जो मात्र 32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से कम है, वहाँ पर एथलेटिक्स की स्थिति धीरे-धीरे सुधार रही है। अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन के गठन से क्षेत्र में खेलों के विकास को एक नया दिशा मिला है। अब्दुल फताह और उनके जैसे अन्य युवा एथलीटों को अब बेहतर कोचिंग और ट्रेनिंग की सुविधाएं मिल रही हैं। यही नहीं, एसोसिएशन ने अब तक लगभग 384 एथलीटों को प्रशिक्षित किया है।

आने वाली उम्मीदें:

अब्दुल फताह और अन्य एथलीटों के लिए हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और अन्य राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिताओं में उनकी सफलता से लक्षद्वीप को उचित ट्रेनिंग सुविधाएं और नौकरियों की उम्मीद है। फताह ने कहा, “हमारे जैसे छोटे द्वीपों से आने वाले एथलीटों के लिए अवसरों की कमी होती है, लेकिन अब हमें उम्मीद है कि हालात बदलेंगे।”


समापन:
अब्दुल फताह की स्वर्ण पदक जीत ने न सिर्फ़ लक्षद्वीप बल्कि पूरे देश में यह संदेश दिया है कि कठिनाइयों के बावजूद यदि सपना सच्चा हो, तो सफलता जरूर मिलती है। अब्दुल फताह की यह सफलता उनके परिवार के संघर्ष और उनकी मेहनत का परिणाम है। यह उनके जैसे युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है।

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