मुनारा निर्माण
वन सुरक्षा में मुनारा निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका
रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल ने वन सुरक्षा और प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मुनारा निर्माण के तहत कुल 227 नए बाउंड्री पिलर (मुनारे) का सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है। यह कार्य राज्य के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में किया गया है और यह वन सीमाओं के स्पष्ट निर्धारण, संरक्षण और विवादों के समाधान में एक अहम पहलू साबित हो रहा है।
मुनारा निर्माण का उद्देश्य और महत्व
मुनारा निर्माण केवल वन की सीमा तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनों की सुरक्षा, प्रबंधन और कानूनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एक बहुआयामी उपकरण है। इससे वन रक्षकों और गश्ती दल को निगरानी कार्य में बड़ी सहूलत मिलेगी और वनों की सुरक्षा अधिक प्रभावी होगी। मुनारे को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से तैयार किया गया है, ताकि वे लंबे समय तक टिकाऊ रहें और वन क्षेत्र की स्पष्ट सीमाओं का निर्धारण हो सके।
अवैध कब्जों और चोरी पर रोक
- वन सीमा निर्धारण: अब स्पष्ट सीमांकन के कारण वन भूमि की सही पहचान हो सकेगी, जिससे ग्रामीणों और वन विभाग के बीच विवादों की स्थिति में कमी आएगी।
- अतिक्रमण पर रोक: पहले अज्ञानता या सीमांकन की अस्पष्टता के कारण अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ जाती थीं, लेकिन अब मुनारों के माध्यम से इन घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
- कानूनी साक्ष्य: विवाद की स्थिति में ये मुनारे कानूनी साक्ष्य के रूप में भी कार्य करेंगे, जिससे बेदखली की कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
वन्यजीवों और जैव विविधता के संरक्षण में मदद
मुनारा निर्माण का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू वन्यजीवों के आवागमन और जैव विविधता के संरक्षण में योगदान है। स्पष्ट सीमाओं के कारण वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर आने-जाने में आसानी होगी और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा की जा सकेगी। इससे वन संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण में भी मजबूती आएगी।
प्रबंध संचालक की सराहना
कवर्धा परियोजना मंडल द्वारा किए गए मुनारा निर्माण कार्य की हाल ही में निरीक्षण के दौरान प्रबंध संचालक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार ने सराहना की। उन्होंने इस कदम को वन संरक्षण और प्रबंधन में राज्य सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।