दवा खरीदने की आज़ादी: छत्तीसगढ़ में प्राइवेट अस्पतालों की फार्मेसी पर लगेगा लगाम, मरीज अब बाहर से भी ले सकेंगे दवा


दवा खरीदने की आज़ादी


📝 विशेष आलेख (400+ शब्द)

छत्तीसगढ़ | मरीज अधिकारों की दिशा में बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य के किसी भी प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को अस्पताल परिसर में मौजूद मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के नियंत्रक द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

यह फैसला लंबे समय से चली आ रही मरीजों की शिकायतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया गया है, जिसमें अस्पतालों की फार्मेसियों द्वारा मनमानी वसूली और विकल्पहीनता का आरोप लगता रहा है।


📜 आदेश में क्या कहा गया है?

जारी निर्देशों के अनुसार:

  • सभी निजी अस्पतालों की फार्मेसी में
    “यहां से दवा खरीदना अनिवार्य नहीं है”
    यह सूचना स्पष्ट और बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य होगा
  • यह तख्ती मरीजों को आसानी से दिखने वाले स्थान पर लगानी होगी
  • आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है

इससे मरीजों को यह साफ संदेश मिलेगा कि वे दवा किसी भी पंजीकृत मेडिकल स्टोर से खरीद सकते हैं।


❗ अब तक क्या थी समस्या?

अब तक निजी अस्पतालों में यह आम शिकायत रही है कि:

  • डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं
    • केवल अस्पताल की फार्मेसी में ही उपलब्ध बताई जाती थीं
  • मरीजों पर बाहर से दवा न लेने का
    • सीधा या परोक्ष दबाव डाला जाता था
  • दवाएं अक्सर
    • एमआरपी पर बेची जाती थीं
    • कोई छूट नहीं दी जाती थी

बड़े और मध्यम निजी अस्पतालों की अपनी फार्मेसी होती है, जबकि छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों में डॉक्टरों और बाहरी मेडिकल स्टोर्स की सांठगांठ की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।


🧑‍⚕️ मरीजों के लिए क्यों है यह फैसला अहम?

इस निर्णय से मरीजों को कई स्तर पर फायदा होगा:

  • 💊 दवा खरीदने का विकल्प और स्वतंत्रता
  • 💰 दवाओं की कीमतों में
    • तुलना कर सस्ती दवा खरीदने का मौका
  • ⚖️ अस्पतालों की
    • व्यावसायिक मनमानी पर रोक
  • 🧾 पारदर्शिता और
    • मरीज अधिकारों को मजबूती

यह फैसला खासकर उन मरीजों के लिए राहत लेकर आया है जो लंबे समय तक इलाज कराते हैं और जिन पर दवाओं का खर्च बड़ा आर्थिक बोझ बन जाता है।


🏥 अस्पतालों पर क्या पड़ेगा असर?

  • अस्पतालों की फार्मेसी अब
    • मरीजों को बाध्य नहीं कर पाएंगी
  • प्रतिस्पर्धा बढ़ने से
    • सेवा गुणवत्ता सुधारने का दबाव
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पताल
    • प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में आएंगे

⚠️ आगे की चुनौती

हालांकि आदेश जारी हो गया है, लेकिन इसकी जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी जरूरी होगी।

  • क्या सभी अस्पताल सही तरीके से सूचना लगाएंगे?
  • क्या मरीज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे?

इन सवालों का जवाब आने वाले समय में प्रशासनिक सतर्कता से तय होगा।

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