बिटावन बाई ध्रुव
किसान की मेहनत और व्यवस्था का भरोसा: बिटावन बाई ध्रुव की प्रेरक कहानी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था आज केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन चुकी है। इस व्यवस्था की सफलता की एक सशक्त मिसाल हैं धमतरी जिले के आमदी गांव की किसान बिटावन बाई ध्रुव, जिनका परिवार आज धान की खेती से आगे बढ़कर शिक्षा और दलहन उत्पादन की ओर कदम बढ़ा रहा है।
उनकी कहानी बताती है कि जब मेहनत और सही नीति साथ चलें, तो ग्रामीण जीवन में स्थायी बदलाव संभव है।
🌾 साढ़े चार एकड़ खेत से 92 क्विंटल धान
श्रीमती बिटावन बाई ध्रुव ने अपने साढ़े चार एकड़ खेत में कड़ी मेहनत से धान की खेती की। इस वर्ष उन्होंने:
- ✅ 92 क्विंटल धान का उत्पादन किया
- ✅ धान को आमदी सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर बेचा
- ✅ ऑफलाइन टोकन से लेकर तौल तक पूरी प्रक्रिया सरल पाई
सोसायटी में उन्हें बारदाना, छाया, पेयजल और समयबद्ध तौल जैसी सभी सुविधाएं व्यवस्थित रूप से मिलीं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
🏦 पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा भरोसा
बिटावन बाई बताती हैं कि पहले धान बेचने को लेकर मन में चिंता रहती थी, लेकिन अब:
- ✔️ खरीदी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी है
- ✔️ समय पर भुगतान की उम्मीद रहती है
- ✔️ शासन-प्रशासन पर किसानों का भरोसा बढ़ा है
यह बदलाव सिर्फ एक किसान का अनुभव नहीं, बल्कि गांव-गांव तक महसूस किया जा रहा है।
🌱 धान से दलहन की ओर: आय में विविधता की सोच
धान बिक्री से मिली आय का उपयोग बिटावन बाई ध्रुव बेहद समझदारी से कर रही हैं:
- 🌾 एक हिस्सा रबी मौसम में दलहन खेती, खासकर चने की फसल में निवेश
- 🌱 इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी
- 💰 आय के नए स्रोत विकसित होंगे
- 🧾 कुछ राशि से पुराने कर्ज का भुगतान
यह कदम उन्हें आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बना रहा है।
📚 शिक्षा में निवेश: आने वाली पीढ़ी का भविष्य
बिटावन बाई ध्रुव का परिवार पूरी तरह खेती पर निर्भर है। उनके परिवार में:
- दो बेटे
- बहू
- नाती-पोते
धान बिक्री से प्राप्त राशि का एक बड़ा हिस्सा वे अपने नाती-पोतों की पढ़ाई में खर्च करेंगी। उनका मानना है कि:
“खेती से आज का पेट भरता है, लेकिन शिक्षा से आने वाली पीढ़ी आत्मनिर्भर बनती है।”
🏡 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
बिटावन बाई ध्रुव की यह यात्रा दिखाती है कि:
- किसान-हितैषी नीतियां जब ज़मीन पर उतरती हैं
- तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है
- महिलाएं किसान नेतृत्व की मिसाल बनती हैं
- आत्मनिर्भर भारत की नींव गांवों से पड़ती है