पेट की समस्याओं से लेकर त्वचा के लिए बेहद कारगर है चांगेरी घास, जानिए इस्तेमाल

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में कई बड़ी बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है। चांगेरी घास को आमतौर पर खट्टी खास के रूप में जानते है। दवाईयों के साथ ही यह खाने का स्वाद बढ़ाने और पत्तों का उपयोग चटनी, सूप और अन्य व्यंजनों में भी किया जाता है।

सेहत के लिए हम कई प्रकार की दवाईयों पर निर्भर रहते है लेकिन इलाज जड़ से खत्म नहीं होता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में कई बड़ी बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है। आज हम बात कर रहे है चांगेरी की। इसे आमतौर पर खट्टी खास के रूप में जानते है इसका पौधा भारत में आसानी से मिल जाता है। दवाईयों के साथ ही यह खाने का स्वाद बढ़ाने और पत्तों का उपयोग चटनी, सूप और अन्य व्यंजनों में भी किया जाता है।यहां पर चांगेरी का वैज्ञानिक नाम ‘ऑक्सालिस कॉर्निकुलाटा’है। जो बारह महीने या बारहमासी पौधे में से एक होता है। इसकी पत्तियों का कभी आप स्वाद लेंगे तो जानेंगे कि, इसकी पत्तियां स्वाद में खट्टी होती हैं। यह आमतौर पर बगीचों, मैदानों और सड़क के किनारों में पाया जाता है। (आईएएनएस इनपुट के अनुसार)

आयुर्वेद में, चांगेरी का उपयोग पाचन समस्याओं, दस्त, और बवासीर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। वहीं पर महिलाओं के लिए यह औषधि के समान है महिलाओं में होने वाली ल्यूकोरिया (व्हाइट डिस्चार्ज) की समस्या में कारगर है। इसके पत्ते का रस मिश्री के साथ लेने से फायदे मिलते है। इसके पत्तों का उपयोग चटनी, सूप और अन्य व्यंजनों में भी किया जाता है।

बताया जाता है कि चांगेरी के पत्तों में कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है। इसके पत्तों का लेप आप जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन को कम करने के लिए कर सकते है। इस चांगेरी के पत्तों से किसी भी दर्द से राहत मिलती है। इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से चर्चा करना जरूरी होता है। चांगेरी विटामिन-सी का एक अच्छा स्रोत है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।

चांगेरी नामक औषधि के बारे में चरक और सुश्रुत संहिता में वर्णन किया गया है। चरक संहिता में इसे शाक वर्ग और अम्लस्कन्ध, तथा सुश्रुत संहिता में इसे शाक वर्ग के बारे में जाना जाता है। चांगेरी की पत्तियों का सेवन दस्त या पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए करते है। आप इसके पत्तों को काढ़ा बनाकर पी सकते है। इसके लिए चांगेरी के पत्तों का काढ़ा (20-40 मिली) भुनी हुई हींग के साथ मिलाकर पीने से पेट दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं में राहत देता है।

चांगेरी केवल पाचन के लिए नहीं त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना गया है। दरअसल चांगेरी के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीफंगल गुण पाए जाते है जो मुहांसे, काले धब्बे और त्वचा की जलन को कम करने का काम करते है। इसका इस्तेमाल त्वचा के लिए करना बेहद आसान है। इसके लिए आप चांगेरी के फूलों को पीसकर चावल के आटे के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाते है तो आपका चेहरा निखरता है। इतना ही नहीं दाग-धब्बों से छुटकारा मिलने लगता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *