बौखलाए पुतिन ने शुरू कर दी आर-पार की जंग? यूक्रेन पर पहली बार दागी इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल

यूक्रेन-रूस जंग अब भयानक स्थिति में पहुंचता दिख रहा है। यूक्रेन द्वारा रूसी शहरों को अमरीकी और ब्रिटिश मिसाइलों से निशाना बनाने के बाद अब रूस ने भी अपना दांव चल दिया है। गुरुवार को यूक्रेन ने बताया है कि रूस ने लगभग 3 साल से जारी इस जंग में पहली पार यूक्रेन पर इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। हजारों किलोमीटर दूर किसी भी शहर को बर्बाद करने के लिए डिजाइन की गई मिसाइल का यह युद्ध की शुरुआत के बाद से कथित तौर पर पहला उपयोग है। वहीं रूसी अधिकारियों ने इस मामले पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

यूक्रेनी वायु सेना ने कहा है कि रूसी हमले में मध्य-पूर्वी शहर द्निप्रो में अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था। बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि इन हमलों में कोई नुकसान हुआ या नहीं। गौरतलब है कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज हजारों किलोमीटर होती है और इनका इस्तेमाल परमाणु हथियार दागने के लिए किया जा सकता है। यूक्रेनी वायु सेना ने हमले के दौरान छह क्रूज मिसाइलों को भी मार गिराया। वायु सेना ने हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों का विवरण देते हुए कहा, “रूस के सैन्य ठिकाने से एक इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक लॉन्च की गई थी।”

इससे पहले यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अमेरिका में बने ATACMS और ब्रिटेन में निर्मित स्टॉर्म शैडो हथियारों का इस्तेमाल किया था। इस बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका और कुछ यूरोपीय संघ के देशों ने बुधवार को कीव में अपने दूतावासों को बंद करने का ऐलान किया था। पुतिन की बड़ी चेतावनी के बाद इन दूतावासों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। वहीं रूस ने पहले ही यह चेतावनी दी थी कि अगर यूक्रेन जंग में अमेरिकी या पश्चिमी देशों के हथियार का सीधा उपयोग करेगा तो दुनिया विश्व युद्ध के करीब पहुंच जाएगी।

क्या होती हैं इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें?

इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) लंबी दूरी की मिसाइलें होती हैं जिसे मुख्य रूप से परमाणु हथियार के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया था। ICBM की रेंज 6,000 से 9,300 मील के बीच होती है। इसे जमीन से या समुद्र से भी छोड़ा जा सकता है। ICBM को एक रणनीतिक रक्षात्मक हथियार माना जाता है जिसका इस्तेमाल परमाणु युद्ध में किया जाता सकता है। वहीं किसी मिसाइल को ICBM कहलाने के लिए उसमें कम से कम 5,500 किलोमीटर की मारक क्षमता होनी चाहिए।

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