ईश्वर ने बनाया ‘भजन सम्राट’, मगर मुझे जल्दी मशहूर होने का दुख है, क्यों बोले अनूप जलोटा?

साहित्य के महाकुंभ ‘साहित्य आजतक’ के 3 दिवसीय कार्यक्रम का आगाज हो गया है. भजन सम्राट अनूप जलोटा ने सरस्वती और गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने सुरों की महफिल ऐसी छेड़ी कि माहौल भक्तिमय हो गया. अनूप जलोटा लागी तुझसे लगन, जग में सुंदर है दो नाम गाकर सबको मंत्रमुग्ध किया. उन्होंने रामलला को लेकर भजन भी सुनाया.

जल्दी फेमस होने का दुख- अनूप जलोटा
अनूप जलोटा ने संगीत सीखने की जर्नी पर भी बात की. अपने स्ट्रगल के बारे में बताया. वो कहते हैं- स्ट्रगल को डिस्कशनरी से निकाल देना चाहिए. क्योंकि वो ट्रेनिंग पीरियड है. उस वक्त जो सीखते हैं वो आगे काम आता है. मुझे दुख है मेरा नाम जल्दी हो गया था. तब मैं पिता से उन दिनों संगीत सीख रहा था. सीरियस क्लासिकल म्यूजिक सीख रहा था. अचानक मेरा एक एलबम हिट हो गया, उसका नाम था ‘भजन संध्या’. लोगों ने मुझे भजन सम्राट कहना शुरू कर दिया था.

तब मेरी 27-28 साल की उम्र थी. लेकिन ईश्वर ने अचानक मुझे पूरी दुनिया में फेमस कर दिया. हर जगह, गली गली वो भजन बज रहा था. वो मेरे अंदर का दुख है ईश्वर ने जल्दी शोहरत दिला दी. अगर 5 साल चीजें रुक जातीं तो जो अभी गाता हूं उससे और अच्छा गाता. तब मेरा रियाज और हो जाता. लेकिन ये ईश्वर की मर्जी होती है. 

पिता से सीखा संगीत 

उन्होंने बताया कैसे पिता से उन्होंने संगीत की तालीम ली. वो कहते हैं- पिता जी हमारे अच्छे क्लासिकल सिंगर थे, भजन गाते थे. हम 5 भाई-बहन हैं. जब रियाज की बारी आती थी तो मैं ही उनके साथ बैठता था. तो वो समझ गए यही है जो बिगड़ा है इसे सिखाना चाहिए. 7 साल की उम्र से गा रहा हूं. तबसे महीने के 20 प्रोग्राम कर रहा हूं. मैंने देखा लोग जो सामने सुनते हैं उनके अंदर अच्छे शब्द, अच्छा संगीत घर कर जाता है . 45 साल पहले ‘ऐसी लागी लगन’ गाया था. आज भी वो लोगों को पसंद है. मेरा विश्वास था अच्छी कविता हो, अच्छे भाव, ट्यून हो तो वो गाना कभी भी पुराना नहीं होगा, मैं आज भी हर मंच पर उसे गाता हूं.

सिंगर ने बताया पिता ने उन्हें समझाया था कि रोज रियाज करना बेहद जरूरी है. जैसे रोज ना नहाने पर शरीर से बदबू आने लगती है, ठीक वैसे गाने से भी बदबू आने लगेगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *