रायपुर: राज्यपाल रमेन डेका ने आज हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर रायपुर के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। राज्यपाल ने नर्मदा कुंड हनुमान मंदिर (स्टेशन चौक) और सर्व धर्म हनुमान मंदिर (रेलवे स्टेशन कैम्पस) में विधिवत पूजा की और हनुमान जी से प्रदेश की खुशहाली के लिए आशीर्वाद लिया।
कोपलवाणी स्कूल के बच्चों ने किया राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट
आज का दिन विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के रूप में भी मनाया गया। इस अवसर पर कोपलवाणी स्कूल के स्पीच थेरेपी सेंटर के बच्चे, उनके माता-पिता और शिक्षकों के साथ लोकभवन पहुंचे और राज्यपाल रमेन डेका से शिष्टाचार भेंट की। यह अवसर विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि यह ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने में एक अहम कदम साबित हुआ।
राज्यपाल डेका ने बच्चों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों के साथ आत्मीय संवाद किया और विशेष बच्चों की क्षमताओं और चुनौतियों को गहरी संवेदनशीलता के साथ समझा। उन्होंने बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।
नीले गुब्बारे छोड़कर दिया समान अवसर का संदेश
कार्यक्रम के दौरान, बच्चों और राज्यपाल ने मिलकर नीले रंग के गुब्बारे आकाश में छोड़कर यह संदेश दिया कि समाज में हर बच्चे को समान अवसर, समझ और स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। यह एक अद्वितीय और भावनात्मक पल था, जो दर्शाता है कि हम सभी को विशेष बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और उन्हें भी समाज में बराबरी का हक देना चाहिए।
ई-रिक्शा की पहल: बच्चों की आवागमन की सुविधा के लिए एक कदम आगे
राज्यपाल डेका ने कोपलवाणी संस्था के बच्चों के लिए ई-रिक्शा की सुविधा भी प्रदान की। उन्होंने स्वेच्छानुदान मद से इस वाहन को उपलब्ध कराया और ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कदम विशेष बच्चों के लिए उनकी दैनिक यात्रा को आसान और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
कोपलवाणी की डायरेक्टर पद्मा शर्मा ने इस पहल को सराहा और बताया कि यह पहली बार है जब विशेष बच्चे लोकभवन पहुंचे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बातचीत करते हुए कहा कि इस दिन को उनके लिए एक गर्व का क्षण माना जाएगा, जब उनके बच्चे राज्यपाल से मिलकर समाज में अपनी पहचान बना रहे हैं।
समाज में विशेष बच्चों के लिए बेहतर अवसर और मार्गदर्शन की आवश्यकता
इस कार्यक्रम से यह साफ संदेश मिला कि समाज में विशेष बच्चों के लिए समान अवसर और समझ जरूरी है। सही मार्गदर्शन, विशेष शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के संवेदनशील लोगों के सहयोग से ये बच्चे निश्चित ही जीवन में उत्कृष्ट मुकाम प्राप्त कर सकते हैं।
राज्यपाल डेका की यह पहल न केवल ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करेगी, बल्कि समाज को यह सिखाएगी कि हमें अपने विशेष बच्चों के लिए एक समावेशी और सहायक वातावरण तैयार करना चाहिए।