दून मेडिकल कॉलेज में उपनल के जरिये लगे 110 सफाई कर्मचारियों के मामले में प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया है। मंगलवार को कर्मचारी जब प्राचार्य डॉ. गीता जैन से मिले तो उन्होंने शासन स्तर से ही प्रक्रिया शुरू होने की बात कही।
उन्होंने बताया कि पहले उपनल के नाम टेंडर था, अब निजी एजेंसी का टेंडर हो गया है, लेकिन वह अभी सेवाएं नहीं दे रही है। इस पर कर्मचारियों ने कहा कि उनको यहां 15 से 20 साल हो गए हैं, कोरोनाकाल में जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन अब वे कहां जाएंगे?
इस दौरान प्रधान अशोक, विष्णु, राहुल, संदीप, सुदेश, मनोज, कुनाल, विनोद, देवेंद्र, रजनी, कपिल, रमिता, रेखा और मोनू मौजूद रहे। 16 हजार में घर नहीं चलता, 11 में क्या होगा?: प्राचार्य से मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि उपनल से 16 हजार रुपये के साथ ईएसआई और ईपीएफ का लाभ मिलता है। लेकिन, यदि ठेकेदार उनको रख भी लेता है तो दस से 11 हजार रुपये देगा। महंगाई के दौर में इतने कम पैसों में उनका घर कैसे चलेगा?
कर्मचारियों ने पूर्व विधायक राजकुमार से भी मुलाकात की। पूर्व विधायक ने निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना से वार्ता की। वे बोले, सफाई कर्मचारियों ने दून अस्पताल को कीमती समय दिया। अब उनको हटाकर निजी एजेंसी को काम दिया जा रहा है। इस मामले में प्राचार्य कार्यालय के बाहर धरना देंगे। मंत्री-सचिव से भी वार्ता की जाएगी।