दिल्ली शहर, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विकास के लिए जाना जाता है, वहां की सड़कों पर पैदल चलना एक चुनौती से कम नहीं है. अगर आपके पास गाड़ी या टू व्हीलर नहीं है, तो शायद आप सड़कों पर पैदल चल नहीं सकते. दिल्ली की सड़कों से फुटपाथ गायब हो चुके हैं, जिन पर अब अतिक्रमण है. इस वजह से लोग फुटपाथ की बजाय सड़कों पर पैदल चलते दिखाई देते हैं. एक सर्वे के अनुसार, दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में से 44 प्रतिशत लोग वे होते हैं जो ट्रैफिक के बीच पैदल चलते हैं.
हमने दिल्ली के विभिन्न सड़कों का जायजा लिया, जहां लोग मजबूरन पैदल चलते नजर आए और उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की. कर्दमपुरी से दुर्गापुरी चौक तक का फुटपाथ पूरी तरह से अतिक्रमण का शिकार हो चुका है. अतिक्रमण के माफिया ने सड़कों पर कब्जा कर लिया है, जिससे आम आदमी के लिए पैदल चलना मुश्किल हो गया है.
इसके अलावा, उत्तर पूर्वी दिल्ली के खजूरी चौक इलाके में 60 फीट चौड़ी सड़क पर रेडी पटेल वालों ने फुटपाथ और सड़कों को घेर रखा है. जगत पुरी मार्केट की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है, जहां पढ़े-लिखे लोग फुटपाथ पर गाड़ियां पार्क करते नजर आते हैं. उन्होंने कहा कि पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन फुटपाथ पर गाड़ियां पार्क करनी पड़ती हैं.
फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी एमडी पीडब्ल्यूडी और दिल्ली पुलिस की है. जब एमसीडी नेता सदन मुकेश कुमार गोयल से सीधा सवाल किया कि कब इसका समाधान होगा, तो उन्होंने कहा कि एमसीडी समय-समय पर कार्रवाई करती है और शिकायत मिलने पर ड्राइव चलाई जाती है. लेकिन, आज तक की टीम ने इन अतिक्रमण की सच्चाई को कैमरे में कैद किया है, जिससे स्पष्ट है कि अधिकारियों को ध्यान देना आवश्यक है. यह स्थिति भयावह है और इसमें शीघ्र सुधार की जरूरत
दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलना अगर एक चुनौती से कम नहीं है. फुटपाथों पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है और इसके समाधान के लिये सरकारी एजेंसियों को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है. यह केवल पैदल यात्रियों की सुरक्षा हेतु ही नहीं बल्कि सड़कों पर सुगम यातायात के लिए भी आवश्यक है.