Adani Group JAL डील
Adani Group की JAL डील पर वेदांता की याचिका के कारण NCLAT में स्थगन
अदाणी समूह द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर एक नया मोड़ आया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई को स्थगित कर दिया है। यह याचिकाएं अदाणी समूह द्वारा JAL के अधिग्रहण के लिए 14,535 करोड़ रुपये की बोली के चयन के खिलाफ दायर की गई थीं।
पीठ में बदलाव के कारण स्थगित हुई सुनवाई
एनसीएलएटी ने यह निर्णय उस पीठ की संरचना में बदलाव के कारण लिया, जो वेदांता द्वारा दायर दो अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। पीठ के एक सदस्य की अनुपलब्धता के चलते सुनवाई को स्थगित किया गया है। एनसीएलएटी ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख जल्द ही तय करने का निर्णय लिया है।
वेदांता द्वारा की गई याचिका
वेदांता समूह ने 17 मार्च को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद पीठ द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को मंजूरी दी गई थी। अदाणी समूह ने JAL के अधिग्रहण के लिए 14,535 करोड़ रुपये की पेशकश की थी, जो दिवाला प्रक्रिया के तहत किया गया था।
वेदांता ने यह दलील दी है कि NCLT द्वारा अदाणी की बोली को मंजूरी देना न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है और इस पर पुनः विचार किया जाना चाहिए।
NCLAT का पूर्व निर्णय और उच्चतम न्यायालय की प्रतिक्रिया
24 मार्च को, NCLAT ने JAL के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की बोली पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय वेदांता की अपीलों के अधीन रहेगा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय में भी इस मामले को चुनौती दी गई थी, जहां न्यायालय ने NCLAT के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया।
हालांकि, शीर्ष न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि JAL की निगरानी समिति को कोई भी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने से पहले न्यायाधिकरण की अनुमति प्राप्त करनी होगी।
अदाणी और वेदांता के बीच का विवाद
इस विवाद का प्रमुख कारण JAL के कर्ज पुनर्गठन और उसकी बिक्री प्रक्रिया है, जिसे दिवाला प्रक्रिया के तहत लिया जा रहा है। अदाणी समूह और वेदांता दोनों ही अपनी-अपनी बोली के पक्ष में हैं, और इस बात को लेकर विवाद चल रहा है कि किसे JAL का अधिग्रहण करने का अधिकार मिलना चाहिए।
अदाणी समूह की बोली को NCLT ने पहले मंजूरी दी थी, लेकिन वेदांता ने इसे कानूनी चुनौती दी है। इस प्रक्रिया के परिणाम से कई कंपनियों के निवेश और कर्ज वसूली के मुद्दे जुड़े हुए हैं, जिससे यह मामला और भी पेचीदा बन गया है।
क्या होगा अगला कदम?
अब, एनसीएलएटी इस मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय करेगा। यह सुनवाई यह तय करेगी कि वेदांता की याचिका पर क्या फैसला लिया जाता है और अदाणी समूह को JAL के अधिग्रहण की प्रक्रिया में क्या दिशा मिलेगी।