इजरायल असल में डबल-ट्रबल का सामना कर रहा है. अभी वो साल भर से गाजा में हमास से लड़ रहा था. वहां भी इजरायल के मिशन होते रहते हैं. इसके अलावा लेबनान से हिज्बुल्लाह की जंग शुरू हो गई. इजरायल ने जंग का ऐलान अपने पेजर और वॉकी-टॉकी हमले वाले कोवर्ट ऑपरेशन से किया. इसके बाद लेबनान में बमबारी.
हमास के खिलाफ जंग ने इजरायल को काफी नुकसान पहुंचाया है. साथ ही कई तरह से उसके हाथ बांध भी दिए हैं. सैनिकों को आराम तक नहीं मिला है. सेना में कई तरह की कमी रिपोर्ट की जा रही हैं. साथ ही आर्थिक कमी. जनता का सरकार पर दबाव है कि सीजफायर करो और हॉस्टेज डील करो. ताकि जंग बंद हो. आर्थिक बोझ खत्म हो.
समझ में ये नहीं आ रहा है कि इजरायल का दूसरे जंग का इरादा है, या फिर वह इसके लिए मजबूर किया गया है. लेकिन लेबनान में जमीनी हमला बोलना क्या ठीक रहेगा? क्या इजरायल इस समय जमीनी हमले के लिए तैयार है? हमास से जंग लड़ने के साथ-साथ दूसरे फ्रंट पर इजरायली सेना युद्ध कर पाएगी?
पिछले साल 8 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर घातक हमला किया. इसके बाद से लगातार लेबनान सीमा पर हिज्बुल्लाह लड़ाकों के साथ इजरायल की जंग चल रही है. रॉकेट्स, मिसाइलों और बमों से हमला हो रहा है. पहले हिज्बुल्लाह ने हमला किया. वो गाजा में इजरायली हमले के विरोध में था. सीजफायर की डिमांड कर रहा था.
लगातार छोटी-मोटी जंग चलती रही. लेकिन पिछले हफ्ते इजरायल ने कुछ ऐसा किया जो दुनिया में पहले कभी नहीं हुआ था. एक नई तरह की जंग. लेबनान के कई शहरों में हिज्बुल्लाह लड़ाकों के पेजर और वॉकी-टॉकी धमाकों में फट गए. 20 से ज्यादा लड़ाके मारे गए. करीब 4000 जख्मी हुए. हिज्बुल्लाह और दुनिया हैरान रह गई.
इसके बाद हिज्बुल्लाह ने रॉकेटों और ड्रोन्स से इजरायल पर हमला शुरू किया. बदले में इजरायल ने लेबनान के कई शहरों पर भयानक एयरस्ट्राइक शुरू कर दी. कई हिज्बुल्लाह लीडर्स को मार डाला. लेकिन मामला ये नहीं है. सवाल ये उठता है कि क्या हमास की तरह हिज्बुल्लाह से जंग लड़ पाएगा इजरायल. क्योंकि हिज्बुल्लाह हमास नहीं है.
इजरायल के तीन प्रधानमंत्रियों की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में रह चुके और तेल अवीव के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के सीनियर रिसर्चर योएल गुजांस्की ने कहा कि हिज्बुल्लाह हमास नहीं है. हिज्बुल्लाह एक स्टेट के अंदर मौजूद स्टेट है. इसके पास हमास से कई गुना ज्यादा जटिल मिलिट्री ताकत और सपोर्ट है.
हिज्बुल्लाह ने पिछले हफ्ते के अंत में इजरायल के अंदर कई शहरों पर घातक हमले किए. किरयत बियालिक, सुर शालोम, मोरशेत, हाइफा. ये सभी शहर लेबनान सीमा से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है. हर हमले को इजरायल का आयरन डोम रोक भी नहीं पाया. ताकतवर हमला हुआ तो रोकना और मुश्किल हो जाएगा.
पिछले एक साल में इजरायल ने सीमा के पास होने वाले हमलों की वजह से 62 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किया है. 26 इजरायली नागरिक और 22 सैनिक मारे गए हैं. वहीं, लेबनान की तरफ 94 हजार लोगों विस्थापित हुए हैं. जबकि 740 लोग मारे गए हैं, जिनमें करीब 500 हिज्बुल्लाह फाइटर्स थे. सोमवार यानी 23 सितंबर 2024 से हो रहे इजरायली हमलों में अब तक लेबनान में 558 लोग मारे गए हैं. करीब 16,500 लोग विस्थापित हुए हैं.
हिज्बुल्लाह को ईरान का पूरा समर्थन है. इस शिया इस्लामिक संगठन ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे हथियारों का प्रदर्शन किया है, जो बड़े-बड़े देशों के पास होते हैं. जिन्हें बनाना और विकसित करना बेहद कठिन है. जटिल है. हिज्बुल्लाह का समर्थन करने वाले इराक और यमन में भी हैं. इसके अलावा मिडिल-ईस्ट में कई मित्र देश हैं.
2006 में हिज्बुल्लाह के साथ हुए जंग के बाद इजरायल की मिलिट्री क्षमता बदली है. सुधरी है. ताकतवर हुई है. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि हिज्बुल्लाह के पास 30 से 50 हजार लड़ाके हैं. जबकि संगठन के प्रमुख हसन नसरूल्लाह ने कहा कि उसके पास 1 लाख लड़ाके हैं. इसके अलावा रिजर्व फोर्स भी है.
हिज्बुल्लाह के पास 1.20 लाख से लेकर 2 लाख रॉकेट्स और मिसाइल हैं. हिज्बुल्लाह के पास सबसे बड़ी ताकत है, उसकी लंबी रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल. करीब 1500 ऐसी मिसाइलें हैं, जो 250 से 300 किलोमीटर रेंज में सटीक हमला कर सकती हैं. हिज्बुल्लाह का दावा है कि हाल ही में उसने इजरायल के रमत डेविड एयरबेस पर Fadi-1 और Fadi-2 मिसाइल से हमला किया. ये लंबी दूरी की मिसाइले हैं.
फाउंडेशन ऑफ डेमोक्रेसीस थिंक टैंक के सीनियर फेलो बेनम बेन तालेब्लू ने कहा कि इन मिसाइलों में जो वॉरहेड लगाया गया है, उसे हिज्बुल्लाह ने पिछले साल ठंड में पेश किया था. ये बुरकान IRAM का वैरिएंट है. जो इजरायल में तबाही मचा रहा