हिंडनबर्ग विवाद- कौन हैं जॉर्ज सोरोस जिसे लेकर कांग्रेस पर हमलावार रहती है बीजेपी?

हाल में जारी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर देश में हंगामा मचा हुआ है। पिछले साल अडानी ग्रुप पर शेयर में हेर फेर का आरोप लगाने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च ने इस बार सेबी प्रमुख माधुरी बुच को लेकर दावे किए हैं। कांग्रेस इसे लेकर बीजेपी पर हमलावर है। वहीं बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि भारत के जाने-माने आलोचक जॉर्ज सोरोस हिंडनबर्ग में एक प्रमुख निवेशक हैं। प्रसाद ने कांग्रेस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नफरत और इस कारण शेयर बाजार को अस्थिर करने और छोटे निवेशकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने भी आरोप लगाया।

यह पहली बार नहीं है जब भाजपा ने जॉर्ज सोरोस को कांग्रेस से जोड़ा है। पिछले साल जून में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर जॉर्ज सोरोस के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया था। स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने सोरोस के करीबी व्यक्तियों से मुलाकात की थी।

जॉर्ज सोरोस एक जाने माने हंगेरियन-अमेरिकी व्यवसायी और निवेशक हैं। उनकी कुल संपत्ति लगभग 6.7 बिलियन डॉलर आंकी गई है। वहीं सोरोस ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन को 32 बिलियन डॉलर से अधिक दान भी दे चुके हैं। फोर्ब्स ने उन्हें दान की गई कुल संपत्ति के प्रतिशत के मामले में सबसे ज्यादा दान देने वाला व्यक्ति बताया था। यहूदी परिवार में जन्मे सोरोस हंगरी के नाजी कब्जे से बच निकले और 1947 में यूके चले गए थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में अपनी पढ़ाई जारी रखी जहां उन्होंने 1951 में फिलोसोफी में स्नातक और 1954 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। सोरोस ने 1969 में अपना पहला हेज फंड डबल ईगल लॉन्च करने से पहले ब्रिटेन और अमेरिका में मर्चेंट बैंकों में अपनी प्रोफेशनल यात्रा शुरू की। इस फंड की मदद ने उन्होंने 1970 में अपना दूसरा हेज फंड, सोरोस फंड मैनेजमेंट खोला। 94 साल के सोरोस ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के माध्यम से नेक कामों के लिए दान देने के लिए जाने जाते हैं।

फरवरी 2023 में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन से पहले बोलते हुए जॉर्ज सोरोस ने हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयर बेचने के मामले पर पहली बार बात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा था कि वे लोकतंत्र का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने यह भी कि अडानी पर हुए खुलासे के बाद भारत में लोकतंत्र फिर से जाग सकता है। उनके इस बयान के बाद भारत में खूब बवाल हुआ था।

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