बाल विवाह रोकथाम
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। जिले के ग्राम दुधली में आयोजित देश की प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के समापन अवसर पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अगुवाई में 20 हजार से अधिक लोगों ने एक साथ बाल विवाह रोकने की शपथ ली और यह आयोजन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया।
यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि समाज को बदलने की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है।
✨ मुख्यमंत्री की सशक्त अपील
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि:
- बाल विवाह समाज की सबसे गंभीर सामाजिक कुरीतियों में से एक है
- इससे बच्चों का शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य प्रभावित होता है
- इसे रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ शासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है
उन्होंने रोवर-रेंजरों, स्काउट-गाइड, युवाओं और ग्रामीणजनों से अपील की कि वे:
- अपने घर-परिवार में जागरूकता फैलाएं
- रिश्तेदारों और पड़ोस में बाल विवाह के दुष्परिणाम समझाएं
- किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना प्रशासन को दें
🏆 20 हजार लोगों की शपथ, बना विश्व रिकॉर्ड
इस ऐतिहासिक अवसर पर:
- एक साथ 20,000+ लोगों ने शपथ ली
- बालोद जिले का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ
- यह उपलब्धि जिले के लिए गौरव का क्षण बन गई
मुख्यमंत्री ने इस अभूतपूर्व आयोजन के लिए जिला प्रशासन की सराहना की और
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा को प्रमाण पत्र प्रदान कर मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
📜 शपथ में लिया गया संकल्प
शपथ के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि:
- वे बाल विवाह नहीं होने देंगे
- ऐसी किसी भी घटना की तुरंत सूचना देंगे
- समाज में लगातार जागरूकता अभियान चलाएंगे
यह सामूहिक संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और सशक्त भविष्य की नींव है।
👥 कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद
इस भव्य आयोजन में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:
- स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव
- सांसद श्री भोजराज नाग
- भारत स्काउट-गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त श्री के.के. खण्डेलवाल
- महासचिव श्री पी.जी.आर. सिंधिया
- देशभर से आए रोवर-रेंजर, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन
🌱 क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
- बाल विवाह रोकथाम से शिक्षा दर बढ़ती है
- बालिकाओं को स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता मिलती है
- समाज में कानूनी और सामाजिक जागरूकता बढ़ती है