रायपुर: छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक अनोखी पहल की गई है, जिसके तहत घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण किया जा रहा है। इस योजना के जरिए महिलाएँ घर पर रहते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं, खासकर वे महिलाएँ जो ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और घर से बाहर काम नहीं कर पातीं। यह योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
योजना का उद्देश्य
वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड, रायपुर द्वारा यह योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत, महिलाओं को घर की बाड़ी में औषधीय पौधों को रोपने के लिए सिंदूरी, सतावर, और अश्वगंधा जैसे पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
औषधीय पौधों का लाभ
इन पौधों को घर के अन्य कामों के साथ आसानी से संभाला जा सकता है। इनके लिए अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती, जिससे महिलाओं को घर के कामकाज के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलता है।
- अश्वगंधा की फसल 6 माह में तैयार होती है।
- सतावर की उपज 24 माह में और
- सिंदूरी से उपज लगभग 36 माह बाद मिलनी शुरू होती है।
इन तीनों पौधों के कच्चे उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बनी रहती है, जिससे इनका विपणन भी सरल होता है। इसके अलावा, बोर्ड ने इसके विपणन के लिए अशासकीय संस्थाओं के साथ अनुबंध कर रखा है, जिससे महिलाओं को बिक्री के लिए उचित रास्ता मिल जाता है।
कम लागत में अच्छा उत्पादन
- सिंदूरी के लगभग 40 से 50 पौधे लगाए जा सकते हैं, जिनके बीच करीब 10 फीट की दूरी रखी जाती है।
- इन पौधों के बीच में 500 सतावर के पौधे लगाए जा सकते हैं।
इस प्रकार, महिलाओं को कम स्थान में भी अच्छा उत्पादन प्राप्त हो सकता है।
योजना का पायलट प्रोजेक्ट
इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट धमतरी जिले में शुरू किया गया है, जहां 27 ग्रामों की 509 महिलाओं की बाड़ी में लगभग 82 हजार सतावर और 39 हजार सिंदूरी के पौधे लगाए गए हैं। महिलाओं को समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और संग्रहण से संबंधित जानकारी भी दी जाती है।
महिलाओं की अतिरिक्त आय
इस योजना के तहत, महिलाएँ सालाना 20,000 से 30,000 रुपए तक की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकती हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें और अपने परिवार की भलाई के लिए काम कर सकें। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से महिलाओं की रोज़ी-रोटी में सुधार हो सकता है, और साथ ही, यह कदम ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।