हॉर्नबिल संरक्षण
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रायपुर।
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण के लिए एक अनोखी और सराहनीय पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत प्राकृतिक उद्यान विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य इन आकर्षक और महत्वपूर्ण पक्षियों को वर्षभर प्राकृतिक भोजन और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है।
क्यों खास हैं हॉर्नबिल?
- हॉर्नबिल दुनिया के सबसे अनोखे और आकर्षक पक्षियों में गिने जाते हैं।
- इनकी बड़ी चोंच, रंगीन पंख और विशिष्ट घोंसला बनाने की शैली इन्हें अलग पहचान देती है।
- इन्हें “जंगल का किसान” या “फॉरेस्ट इंजीनियर” भी कहा जाता है।
- ये फल खाकर बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे वनों का प्राकृतिक विस्तार होता है।
क्या है “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” योजना?
यह कोई कृत्रिम निर्माण नहीं होगा, बल्कि:
- जंगल और आसपास के क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का प्राकृतिक समूह विकसित किया जाएगा।
- पीपल, बरगद और फाइकस प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे।
- ये पेड़ हॉर्नबिल का प्रमुख आहार उपलब्ध कराएंगे।
इस पहल से पक्षियों को पूरे वर्ष भोजन मिलेगा और उनके आवास क्षेत्र का विस्तार होगा।
संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदम
हॉर्नबिल संरक्षण के तहत:
- घोंसलों की नियमित निगरानी
- कृत्रिम घोंसले लगाने की योजना
- स्थानीय समुदाय की भागीदारी
- “घोंसला गोद लेने” कार्यक्रम
- ड्रोन तकनीक से निगरानी
वन विभाग ने विशेष ट्रैकिंग टीमें गठित की हैं, जिनमें वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ स्थानीय प्रशिक्षित युवाओं को भी शामिल किया गया है।
क्यों बढ़ रही है हॉर्नबिल की संख्या?
- उदंती-सीतानदी का पहाड़ी क्षेत्र समुद्र तल से 800–1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- अनुकूल जलवायु और हरियाली के कारण अब यहां इनकी उपस्थिति बढ़ी है।
- पहले जहां ये कभी-कभार दिखते थे, अब सप्ताह में 2–3 बार नजर आ रहे हैं।
ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
यह पहल न केवल हॉर्नबिल संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि:
- ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देगी
- पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में दुर्लभ पक्षियों को देखने का अवसर मिलेगा
- जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी