हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर पहले से ही चर्चाएं थीं कि कांग्रेस मजबूत होकर उभर रही है। एग्जिट पोल्स में कांग्रेस की जोरदार जीत के भी दावे किए गए थे, फिर भी नतीजों में कांग्रेस को करारी हार मिली। भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता मिली और यह चौंकाने वाले नतीजे अब भी कांग्रेस के लिए अध्ययन का विषय बने हुए हैं। हरियाणा की इस हार के पीछे कांग्रेस के विश्लेषण में कहा जा रहा है कि आतंरिक गुटबाजी और सीएम फेस को लेकर खींचतान के चलते यह स्थिति हुई। अब महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के आगे ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है।
एक तरफ टिकट कटने वाले दावेदारों के बागी होने का डर है तो वहीं उद्धव सेना, शरद पवार के साथ सीट शेयरिंग को लेकर मतभेद खत्म नहीं हो रहे हैं। भाजपा ने एकनाथ शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी के साथ सीट शेयरिंग लगभग फाइनल कर ली है। 150 के आसपास उम्मीदवार भाजपा उतारने वाली है और उनमें से 99 के नामों का ऐलान करके बढ़त पा ली है। 20 नवंबर को होने वाले मतदान में भाजपा फिलहाल सबसे आगे है। माना जा रहा है कि पार्टी इसके जरिए अपने प्रचार को धार देना चाहती है और कैंडिडेट्स को पूरा वक्त देने के लिए समय रहते ही ऐलान किए जा रहे हैं।
ऐसी स्थिति में कांग्रेस पिछड़ती दिख रही है। महाराष्ट्र में एक जंग महाविकास अघाड़ी के बीच सीएम फेस को लेकर भी है। उद्धव सेना चाहती है कि पहले सीएम फेस पर सहमति बन जाए, जबकि कांग्रेस की राय है कि इस पर बाद में बात करेंगे। वहीं कांग्रेस सबसे ज्यादा सीटें लड़ना चाहती है। उसने इसके लिए लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने की दलील दी है। इस तरह लोकसभा चुनाव में हरियाणा जैसी ही मजबूती पाने वाली कांग्रेस की विधानसभा में संभावनाएं अच्छी हैं, लेकिन खींचतान के बीच उस प्रदर्शन को दोहराना एक चैलेंज होगा। खासतौर पर सीट बंटवारे में लगातार देरी और फिर कैंडिडेट्स के ऐलान में टाइम लगने से चीजें बिगड़ती जा सकती हैं।
कांग्रेस भी महाराष्ट्र की समस्या को समझ रही है। इसीलिए उसने पहले ही बड़े नामों को जिम्मेदारी दी है और उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में कमान सौंपी है। एक तरफ अशोक गहलोत और कर्नाटक के होम मिनिस्टर जी. परमेश्नवर को मुंबई और कोंकण क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी है। भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी को विदर्भ में काम करने को कहा गया है। सचिन पायलट और तेलंगाना के मंत्री उत्तम रेड्डी को मराठवाड़ा भेजा गया है। वहीं वरिष्ठ समन्वयकों के तौर पर मुकुल वासनिक और अविनाश पांडे को जिम्मेदारी दी है।