भारत और चीन के बीच पिछले चार साल से चल रहा तनाव अब कम हो रहा है। रूस के कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत के बाद दोनों ही देशों के बयानों में नरमी देखने को मिली है। वहीं एलएसी पर सेनाओं का डिसइंगेजमेंट भी शिरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक दोनों ही तरफ से पांच-पांच टेंट हटाए गए हैं। बताया जा रहा है कि 10 से 12 अस्थायी ढांचे हटाए जाएंगे। डेमचोक में चीन के सैनिक नाला से पूर्वी हिस्से की ओर पीछे हट रहे हैं। इसके बाद 22वें राउंड की वार्ता शुरू होगी। यह वार्ता बफर जोन में फिर से गश्त शुरू करने को लेकर होगी।
2020 में गलवान में हुई हिंसा के बाद बढ़े तनाव से निपटना एनडीए सरकार की परीक्षा की तौर पर देखा जा रहा था। अब एनएसए अजित डोभाल भारत की ओर एसआर डायलॉग का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके अलावा चीन से विदेश मंत्री और चाइनीज कम्युनिटी पार्टी सेंट्रल कमेटी कमीशन के हेड वांग यी इस चर्चा का हिस्सा होंगे। विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीना विदेश मंत्री के बीच हालात सामान्य करने को लेकर बातचीत होगी।
15 जून 2022 के बाद से दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की 17 बार चर्चा हुई। 9 सितंबर 2022 को गोगरा हॉट स्प्रिंग्स खुगरांग नाला इलाके में डिसइंगेजमेंट का ऐलान किया गया था। डेपसांग और डेमचोक में पट्रोलिंग राइट्स को लेकर भारत भी अड़ा हुआ ता। अब पूर्वी लद्दाख की 1597 किलोमीटर की सीमा पर पट्रोलिंग को लेकर सहमति बननी है। वहीं जानकारों का कहना है कि भारत और चीन के बीच बनी सहमति तनाव कम करने में कारगर साबित होगी।
एलएसी पर दोनों ही तरफ भारत और चीन ने भारी तैनाती कर रखी है। दोनों देशों ने करीब 50 हजार सैनिक, टैंक, मिसाइल और रॉकेट सीमा पर तैनात कर रखी हैं। एक बार डिइंगेजमेंट पूरा होने और पट्रोलिंग शुरू होने के बाद सैनिकों की संख्या और तैनाती कम की जा सकती है। अब सवाल यही है कि सैनिकों की संख्या कम की जाएगी या फिर टेंट की सीमा से दूरी बढ़ा दी जाएगी। कांग्रेस भले ही नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाती हो कि चीनी सेना के दबाव में वह पीछे हट रही है। हालांकि दोनों देशों के बीच विवाद बहुत पुराना है। यह 1950 से ही चला आ रहा है। सीमा विवाद की वजह से ही 1962 का युद्ध हुआ।